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एक बार इस मासूम की आंखों और अपनी बहन के प्रति उसकी भावनाओं को देखिए, आपकी भी आंखें ना भर आएं तो कहना

जीने के लिए खाना बहुत जरूरी है, जहां कुछ बच्चे ‘टेस्ट अच्छा नहीं है’ इसलिए अपनी प्लेट में खाना छोड़ देते हैं वहीं हर रोज लाखों बच्चे सिर्फ कहानियों से ही पेट भरकर सो जाते हैं. मखमल के बिस्तर पर भी किसी को नींद नहीं आती तो कोई फुटपाथ पर भी चैन की नींद सो जाता है. आजादी के इतने वर्षों बाद भी स्वतंत्र भारत की यही हकीकत है, जहां पानी भी सबको नसीब नहीं होता. भूख से बिलखते इस विकासशील भारत की विडंबना ही यही है कि एक ओर बड़ी-बड़ी इमारतों को अपना आशियाना बनाते हैं तो कुछ के पास कहने के लिए छत तक नहीं है, खुला आसमान ही उनका घर है. ऐशो-आराम की जिन्दगी जीने वाले लोग शायद उस मर्म को ना समझ पाएं जो इस वीडियो में दर्शाया गया है. बस एक बार इस मासूम की आंखों और अपनी बहन के प्रति उसकी भावनाओं को समझकर देखिए, आपकी भी आंखें ना भर आएं तो कहना:





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