Menu
blogid : 316 postid : 1393312

कोरोना मरीज के इलाज में मददगार साबित हुई डेक्सामेथासन दवा, जानिए भारत में क्या है इसकी कीमत

Rizwan Noor Khan

17 Jun, 2020

 

 

कोरोना वायरस से ग्रसित मरीजों के इलाज में डेक्सामेथासन मददगार साबित हुई है। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने क्लीनिकल परीक्षण के बाद यह दावा किया है। इस दवा को 2000 कोरोना पॉजिटिव मरीजों पर इस्तेमाल करके देखा गया है। यह दवा भारत में कम दामों में और आसानी से उपलब्ध है।

 

 

 

 

दो हजार मरीजों पर दवा का परीक्षण
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन की आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने डेक्सामेथासन दवा के परीक्षण के लिए 2000 कोरोना पॉजिटिव मरीजों का चयन किया। इन सभी मरीजों पर दवा का इस्तेमाल किया गया। दवा के परिणाम बेहद सकारात्मक आने पर वैज्ञानिकों में उत्साह है।

 

 

 

 

 

 

परीक्षण के रिजल्ट उत्साहजनक
आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी की टीम के बयान के अनुसार डेक्सामेथासन दवा का इस्तेमाल उन मरीजों पर भी किया गया जो बिना वेंटीलेटर के सांस तक नहीं ले पा रहे थे। प्राथमिक ट्रायल्स में यह सामने आ चुका है कि दवा के परिणाम बेहद उत्साहजनक साबित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना की वजह से होने वाली मौतों में 35 फीसदी तक कमी आने की संभावना है।

 

 

 

 

 

वेंटीलेटर के सहारे जिंदा मरीजों पर अच्छा रिजल्ट
आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी की रिसर्च टीम का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर पीटर हॉर्बी के मुताबिक यह दवा कोरोना वायरस से लोगों को बचाने में बड़ी मददगार साबित हुई है। आक्सीजन के सहारे जिंदा मरीजों पर इस दवा के सकारात्मक और उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि डेक्सामेथासोन सस्ती दवा है और दुनियाभर में लोगों को बचाने के लिए तुरंत इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

 

 

 

भारत में आसानी से उपलब्ध
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डेक्सामेथासन दवा भारत में आसानी से उपलब्ध है। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डेक्सामेथासन की एक टैबलेट की कीमत करीब 20 पैसे है, जबकि 10 टैबलेट के पत्ते के दाम 3 रुपये के करीब हैं। आमतौर पर इस दवा का इस्तेमाल गठिया, अस्थमा, सांस लेने में दिक्कत समेत कई तरह की बीमारियों में किया जाता है। दवा पर चल रहे परीक्षण की अभी शुरुआती रिपोर्ट आई है। पुख्ता रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।..NEXT

 

 

Disclaimer : यह खबर आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी की एक रिसर्च के आधार पर बनी है। दैनिक जागरण इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

 

 

Read More:

अमेरिका से उठी नस्लभेद की चिंगारी इंग्लैंड के बाद ब्राजील पहुंची, सड़कों पर उतरे लोगों ने स्टैच्यू गिराए

कोरोना ने पाकिस्तान में कहर ढाया, जुलाई और अगस्त माह होने वाले हैं सबसे खतरनाक

भारत में कोरोना मरीजों को ठीक करने के लिए इस दवा को मिली मंजूरी

भारत की मदद से 150 देशों के हालात सुधरे, कोरोना महामारी का बने हैं निशाना

दुनिया के 12 देशों की सीमा लांघ नहीं पाया कोरोना, अब तक नहीं मिला एक भी मरीज

 

 

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *