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22 साल से शहीदों की यादें संजो रहा ये पेंटर, परिजनों का दुख कम करने के लिए भेजते हैं हाथ से बनी तस्वीरें

देश की सुरक्षा करने वाले सैनिकों की शहादत कभी भुलाई नहीं जाती है। वे हमेशा अपने परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों के दिलों में रहते हैं। राष्ट्र के लिए जान न्योछावर करने वाले शहीदों के परिजनों का दुख कम करने के लिए जयपुर का एक चित्रकार 22 वर्षों से सेवा में लगा हुआ है। यह चित्रकार परिजनों का दुख कम करने और शहीद की यादें संजोए रखने के लिए पेंटिंग बनाकर देने जाते हैं। शहीदों को याद रखने के लिए किए जा रहे इस काम के लिए चित्रकार की प्रशंसा हो रही है।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan 7 Oct, 2021

 

 

कारगिल युद्ध से शहीदों की पेंटिंग्स बना रहे- 
राजस्थान के जयपुर में रहने वाले पेंटर चंद्र प्रकाश गुप्ता देश के लिए जान गंवाने वाले सैनिकों को याद रखने के लिए उनकी पेंटिंग्स बनाकर परिजनों को भेंट करते हैं। पेशे से पेंटर चंद्र प्रकाश साल 1999 में कारगिल युद्ध के बाद से यह काम अनवरत कर रहे हैं। वह अबतक 270 से अधिक शहीदों के चित्र बनाकर उनके परिजनों को सौंप चुके हैं।

परिजनों को दे चुके 275 शहीदों के चित्र- 
एएनआई को चंद्र प्रकाश गुप्ता ने बताया कि शहीदों के परिवार का दर्द कम करने के लिए मैंने उनका चित्र बनाकर भेंट करने का प्रण लिया। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला 22 वर्षों से जारी है। वह अबतक 275 शहीदों के घर जाकर चित्र भेंट कर चुके हैं। सबसे पहले उन्होंने कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी मिसाइल के हमले में शहीद हुए स्क्वॉड्रन लीडर अजय आहुजा की पेंटिंग बनाई थी।

 

 

कारगिल हीरोज के 85 चित्र बनाए- 
चंद्रप्रकाश आहुजा कारगिल युद्ध के वक्त करीब 30 बरस के थे। एक दिन वह चौरा रास्ता बाजार स्थित अपने देवदास स्टूडियो में काम कर रहे थे। युद्ध में भारतीय जवानों की शहादत को अपनी पेंटिंग और हुनर के जरिए याद रखने और सम्मान देने का प्रण लिया। चंद्र प्रकाश ने 275 शहीदों के चित्रों में से 85 चित्र कारगिल में शहीद हुए जवानों के बनाए हैं।

 

 

पिता से सीखा हुनर देशसेवा में लगा रहे- 
चंद्र प्रकाश ने बड़ा आर्टिस्ट बनने के इरादे से पेंटिंग का हुनर अपने पिता बृज मोहन गुप्ता से सीखा था। लेकिन, जब उन्होंने यह काम शुरू किया तो उन्होंने इसे सामाजिक हित के लिए उपयोग करना शुरू किया और इसी क्रम में वह शहीदों के चित्र बनाने लगे। शहीदों के चित्रों के लिए वह एक भी रुपया नहीं लेते हैं। राजस्थान सरकार के तत्कालीन गवर्नर अंशुमान सिंह ने चंद्र प्रकाश को सम्मानित भी किया था।

 

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