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कोरोना वैक्सीन के लिए 5 लाख शार्क की जिंदगी दांव पर, टीके में इस्तेमाल होगा मछली का तेल

Rizwan Noor Khan

1 Oct, 2020

कोरोना महामारी से मनुष्य तो अपनी जान गवां ही रहा है अब जानवरों की जिंदगी पर आफत आ गई है। जीव संरक्षणकर्ताओं ने चेतावनी जारी की है कि कोरोना वैक्सीन के लिए 5 लाख शार्क की हत्या की जाएगी। दरअसल, दुनियाभर के लिए वैक्सीन के डोज बनाने में शार्क के शरीर में मिलने वाले खास तेल का इस्तेमाल किया जाना है। इसलिए 5 लाख शार्क की जिंदगी खतरे में है।

शार्क के तेल का वैक्सीन में इस्तेमाल
द वेदर चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के हर शख्स को कोरोना से बचाने के लिए वैक्सीन का डोज दिया जाना है। अगर प्रत्येक व्यक्ति को दो डोज दिए गए तो 5 लाख शार्क को मारा जाएगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि शार्क के लीवर में प्राकृतिक तेल स्क्वेलिन पाया जाता है जो कोरोना वैक्सीन के डोज बनाने में सहायक के रूप में इस्तेमाल करने की घोषणा की गई है।

एंटीबॉडी बनाने और इम्यूनिटी मजबूत होगी
स्क्वेलिन को लीवर आइल भी कहते हैं। इसके इस्तेमाल से वैक्सीन का टीका ह्यूमन बॉडी में बड़ी मात्रा के साथ एंटीबॉडी विकसित करेगा और वायरस के खिलाफ इम्यून सिस्टम को ताकतवर बना देगा। इससे वायरस खत्म होने के साथ ही लंबे समय के लिए बॉडी सुरक्षित हो जाएगी। एक टन लीवर आइल स्क्वेलिन पाने के लिए करीब 3 लाख शार्क को मारना पड़ेगा।

फ्लू की वैक्सीन में पहले से इस्तेमा हो रहा तेल
दुनिया की नामचीन दवा निर्माता कंपनी ग्लैक्सो स्मिथलाइन ने कोरोना वैक्सीन के 1 अरब से ज्यादा डोज बनाने का ऐलान किया है। इन डोज में लीवर आइल स्क्वेलिन का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। ग्लैक्सो स्मिथलाइन पहले से ही फ्लू की वैक्सीन के डोज में लीवर आइल स्क्वेलिन का इस्तेमाल कर रहा है।

बिगड़ जाएगा समुद्र का इकोसिस्टम
शार्क ​मछली के संरक्षण के लिए काम करने वाले शार्क एलाइस नामक कैलीफोनिया की संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा हुआ तो समुद्र के इकोसिस्टम को भारी नुकसान पहुंचेगा। संस्थान ने कहा है कि दुनिया के हर शख्स के लिए अगर कोरोना वैक्सीन के दो डोज ​दिए गए तो लीवर आइल स्क्वेलिन के लिए 5 लाख शार्क को मार दिया जाएगा।

कॉस्मेटिक समेत कई उत्पादों में इस्तेमाल
रिपोर्ट के मुताबिक शार्क के अलावा कई अन्य जानवरों के लीवर में भी स्क्वेलिन आइल पाया जाता है। लेकिन, शार्क में यह सबसे ज्यादा मात्रा में होता है। इस आइल को प्राकृतिक जैविक यौगिक के रूप में कई तरह के प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। वर्तमान में इस आइल का सबसे ज्यादा उपयोग कॉस्मेटिक प्रोडक्ट, मशीन के तेल समेत कई तरह के उत्पादों में इस्तेामल किया जा रहा है।…NEXT

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Shark squalene is being considered for use in coronavirus vaccines, warn conservationists. Squalene is a natural organic compound, found in shark liver oil. Between 2,500 – 3,000 sharks are needed to extract one tonne of squalene. Conservation group @sharkallies predicts that if the world’s population all received one dose of the vaccine, around 250,000 sharks would have to be slaughtered, depending on the amount of squalene used. Two doses for every person in the globe would amount to half a million sharks. Shark Allies is concerned that killing so many sharks will do irreversible damage to our oceans’ ecosystems. It says we should be using plant-based and synthetic alternatives for squalene, which don’t derive from sharks. “We are in no way trying to hinder or slow down the development of a COVID-19 vaccine or any other critical treatment that is needed to protect humanity from illness,” states Stefanie Brendl, founder of the California-based group. . #covidvacccine #savesharks

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