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पहली बार विश्वयुद्ध-2 में हुआ था असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल, ये हैं खास बातें

सीमा पार से फायरिंग, घुसपैठ और आतंकी घटनाओं के मद्देनजर बड़ा फैसला लेते हुए डिफेंस मिनिस्ट्री ने हथियारों की खरीद के लिए 15,935 करोड़ के प्रपोजल को मंजूरी दे दी है। इनमें सशस्त्र बलों की शक्ति को और मजबूत करने के लिए 7.40 लाख असॉल्ट राइफलों, 5719 स्नाइपर राइफलों और लाइट मशीन गनों (एलएमजी) की खरीद शामिल है। असॉल्‍ट राइफल का यूज पहली बार द्वितीय विश्‍वयुद्ध के दौरान हुआ था। आइये आपको रक्षा मंत्रालय की इस मंजूरी और असॉल्‍ट राइफल के पहली बार इस्‍तेमाल के बारे में विस्‍तार से बताते हैं।


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7.40 लाख असॉल्‍ट राइफल की होगी खरीदारी

7.40 लाख असॉल्ट राइफल की खरीदारी 12,280 करोड़ रुपये से होगी। इन्हें बाय एंड मेक (इंडिया) कैटेगिरी के तहत बनाया जाएगा। इसमें देश की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड और प्राइवेट सेक्टर्स को शामिल किया जाएगा। इंडियन आर्मी और इंडियन एयरफोर्स के लिए स्नाइपर राइफल्स की खरीद 982 करोड़ रुपये के बजट से होगी। स्नाइपर राइफल्स को बाय ग्लोबल कैटेगिरी में रखा गया है। पहले इन हथियारों के लिए एम्युनेशन की खरीद होगी और इसके बाद इन्हें भारत में भी मैन्युफैक्चर किया जाएगा।


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प्रतीकात्‍मक फोटो


1,819 करोड़ से खरीदी जाएंगी LMG

नेवी की कैपेबिलिटी बढ़ाने के लिए एंटी-सबमरीन वारफेयर खरीदे जाएंगे। इसके अलावा एडवांस टारपीडो डिकॉय सिस्टम (ATDS) भी खरीदे जाएंगे। इसके लिए 850 करोड़ का बजट रखा गया है। डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा है कि लाइट मशीनगन फास्टट्रैक रूट के जरिए आएंगी। साथ ही भारत में भी इनका संतुलित संख्या में बाय एंड मेक (इंडिया) प्रोडक्शन किया जाएगा। 1,819 करोड़ रुपये से LMG खरीदी जाएंगी।


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काफी समय से लंबित था प्रस्‍ताव

रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह काफी समय से लंबित प्रस्‍ताव था। डीएसी रक्षा मंत्रालय की निर्णय लेने वाली शीर्ष इकाई है। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के साथ बढ़ती दुश्मनी तथा लगभग चार हजार किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर कई जगहों पर चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच इन खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।


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प्रतीकात्‍मक फोटो


नजदीकी लड़ाई में कारगर

असाॅल्ट राइफल नजदीकी लड़ाई में काफी कारगर होती है। इनमें रात में देखने की क्षमता भी होगी, जो पुराने AK-47 जैसे हथियारों में नहीं होती थीं। खबरों की मानें, तो पहली बार असॉल्‍ट राइफल का इस्‍तेमाल द्वितीय विश्‍वयुद्ध के दौरान हुआ था। हालांकि, पश्चिमी देश असॉल्‍ट राइफल के कॉन्‍सेप्‍ट को स्‍वीकार करने में काफी धीरे रहे। 20वीं सदी के अंत तक असॉल्‍ट राइफल दुनिया की ज्‍यादातर आर्मी का प्रमुख हथियार बनी। असॉल्‍ट साइफल्‍स ने फुल पावर्ड राइफल्‍स और सब मशीनगन्‍स की जगह ले ली…Next


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