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दुनियाभर में अप्रूव हो चुकी हैं कोरोना की 10 वैक्‍सीन, सबसे ज्‍यादा चीनी वैक्‍सीन को मिली मंजूरी, जानें भारत की स्थिति

कोरोना महामारी को थामने के लिए दुनियाभर में कोरोना वैक्‍सीन विकसित की जा रही हैं। पूरे विश्‍व में अब तक कुल 10 वैक्‍सीन को मंजूरी हासिल हो चुकी है। इनमें से केवल दो वैक्‍सीन को ही फुल यूज का एप्रूवल मिला है, जबकि 8 को अलग अलग श्रेणी में इस्‍तेमाल की मंजूरी दी गई है। सबसे ज्‍यादा चीन की वैक्‍सीन को मंजूरी मिली है। वैक्‍सीन के मामले में भारत की स्थिति मजबूत है।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan 13 Jan, 2021

सबसे ज्‍यादा 95 कारगर इकलौती वैक्‍सीन
दुनियाभर में कोरोना को हराने के लिए सबसे पहले वैक्‍सीन को मंजूरी देने का काम ब्रिटेन ने किया है। ब्रिटेन की दवा कंपनी फाइजर और जर्मन फॉर्मा कंपनी बायोएनटेक की वैक्‍सीन को कोरोना के इलाज में सबसे ज्‍यादा 95 फीसदी कारगर माना गया है। इस वैक्‍सीन को फुल यूज का एप्रूवल हासिल हो चुका है। ब्रिटेन की दूसरी एप्रूवल हासिल करने वाली आक्‍सफोर्ड और आस्‍ट्राजेनेका की वैक्‍सीन है।

चीन की सबसे ज्‍यादा वैक्‍सीन एप्रूव
न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार अब तक सबसे ज्‍यादा एप्रूवल चीन की कोरोना वैक्‍सीन को हासिल हुआ है। चीन की कुल 4 वैक्‍सीन को सीमित, शुरुआती और आपातकालीन इस्‍तेमाल की श्रेणी में एप्रूवल मिला है। चीन की वैक्‍सीन कैनसीनो, सीनोवेक, सीनोफॉर्म और सीनोफॉर्म वुहान को चीन, यूएई, बहरीन और मिस्र में इस्‍तेमाल की मंजूरी हासिल हुई है। चीन ने अपनी वैक्‍सीन सीनोफॉर्म को फुल यूज का एप्रूवल दिया है।

भारत की स्थिति मजबूत
भारत में अब तक दो वैक्‍सीन को इमर्जेंसी इस्‍तेमाल की मंजूरी मिली है। मंजूरी हासिल करने वाली वैक्‍सीन में सीरम इंस्‍टीट्यूट की कोवीशील्‍ड है जिसे आक्‍सफोर्ड के सहयोग से विकसित किया गया हैा इसके अलावा स्‍वदेशी वैक्‍सीन कोवैक्‍सीन को मंजूरी दी गई है। कोवैक्‍सीन को भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान संस्‍थान और फार्मा कंपनी भारत बायोटेक ने विकसित विकसित किया है। भारतीय फार्मा कंपनी जैडस कैडिला की वैक्‍सीन तीसरे फेज में है, जल्‍द ही इसे भी एप्रूवल मिलने की उम्‍मीद है। 16 जनवरी से भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भी शुरू होने वाला है।

विवादों में रहीं 3 वैक्‍सीन
रूस, आस्‍ट्रेलिया और चीन की वैक्‍सीन अलग अलग वजहों से विवादों में घिर चुकी हैं। वर्तमान में चीन की फार्मा कंपनी सीनोवेक की वैक्‍सीन के 78 प्रतिशत कारगर के दावे को लेकर विवादों में है। ब्राजील ने 78 फीसदी कारगर होने के दावे को खारिज करते हुए 50 फीसदी कारगर होने की बात कही है। इससे पहले आस्‍ट्रेलिया के क्‍वींसलैंड यूनिवर्सिटी में विकसित वैक्‍सीन अपने ट्रायल्‍स रिजल्‍ट और सरकार से सामंजस्‍य न होने के चलते विवादों में रही और इस पर रोक लगा दी गई। जून में रूसी वैक्‍सीन स्‍पुतनिक बिना ट्रायल रिजल्‍ट के एप्रूवल मिलने पर विवादों में रही।

80 से ज्‍यादा वैक्‍सीन अलग अलग ट्रायल्‍स में
न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स के अनुसार दुनियाभर में 80 से ज्‍यादा कोरोना वैक्‍सीन ट्रायल के अलग अलग फेज में हैं। 43 वैक्‍सीन फेज वन में हैं। जबकि, 21 फेज-2 में और 20 वैक्‍सीन फेज-3 के ट्रायल्‍स में पहुंच चुकी हैं। 8 वैक्‍सीन को अलग अलग श्रेणी में कई देशों में इस्‍तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, दो वैक्‍सीन को इस्‍तेमाल करने के लिए फुल एप्रूवल हासिल हो चुका है। कई देशों में वैक्‍सीनेशन अभियान चल रहा है, तो कई में शुरू होने वाला है।

एप्रूवल हासिल करने वाली 10 वैक्‍सीन
1- फाइजर बायोएनटेक- फुल यूज एप्रूवल, ब्रिटेन
2- मॉडर्ना- इमर्जेंसी यूज एप्रूवल, अमेरिका
3- गामेलेया- अर्ली यूज एप्रूवल, रूस
4- आक्‍सफोर्ड आस्‍ट्राजेनेका- इमर्जेंसी यूज एप्रूवल, ब्रिटेन
5- कैनसीना- इमर्जेंसी यूज एप्रूवल, चीन
6- वेक्‍टर- अर्ली यूज एप्रूवल, रूस
7- सीनोफॉर्म- फुल यूज एप्रूवल, चीन
8- सीनोवैक- लिमिटेड यूज एप्रूवल, चीन
9- सीनोफॉर्म वुहान- लिमिटेड यूज एप्रूवल, चीन
10- भारत बायोटेक- इमर्जेंसी यूज एप्रूवल, भारत.

 

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