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ममता का कर्ज क्या उसने चुका दिया?

Vichar Manthan

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डॉ शोभा भारद्वाज
मैं इस संस्मरण का निष्कर्ष नहीं निकाल सकी। कुछ वर्ष पुरानी बात है मुस्लिम समाज के रोजे चल रहे थे। ईद को अभी एक हफ्ता शेष था। इन दिनों बाजारों की रौनक निराली होती है। महिलाओं बच्चों के नये डिजाइन के रेडीमेड कपड़े आर्टिफिशियल ज्वेलरी चूड़ियां झूमर और न जाने क्या -क्या से बाजार सजे रहते हैं। हर कीमत के तैयार कपड़े ,लड़कियों की हालत देखने लायक होती है उनका बस चले वह हर रंग की पोशाक खरीद ले। मर्दों में कुरते पहनने वालों के लिए वैराईटी ही वैराईटी है। नामी फैशन डिजाईनर डिजाइन निकालते हैं हल्के कपड़े में वही डिजाइन चांदनी चौक में मिल जाता है।
मुझे काम से चांदनी चौक जाना पड़ा हर और भीड़ ही भीड़ थी। भीड़ में से निकल कर बड़ी मुश्किल से लाल किला बस स्टाप पहुंची। बस तुरंत आ गयी बैठने की जगह मिल गयी मेरे पास एक अधेड़ महिला आ कर बैठ गयी। गर्मी से बेहाल ओंठ सूखे हुए शायद रोजे से थीं। अभी कुछ ही दूर बस चली होगी अजान की आवाज आने लगी अजान खत्म हुई महिला बेचैन नजरो से बाहर देखने लगी। मैं समझ गयी उन्हें पानी चाहिए मैं पानी की बोतल साथ लेकर चलती हूँ पानी देर तक ठंडा रहे रात को बोतल फ्रीजर में रख देती हूँ धीरे -धीरे बर्फ पिघलती रहती है पानी देर तक ठंडा रहता हैं मेरे पास ठंडी बोतल वैसे ही भरी रही पानी पीने की नौबत ही नहीं आई। मैने लपेटी बोतल खोल कर पीने के लिए महिला को दी। वह सकुचाने लगी मेरे जोर देने पर उसने बोतल ले ली बोली मैं जूठी नहीं करूंगी थोड़ा ऊपर कर पानी पीने लगी प्यास पूरी बुझी थी या नहीं उसने चारो तरफ देखा कुछ दूरी पर एक सज्जन बैठे थे उसने पूछा आप रोजे से हैं उनके सिर हाँ में हिलाते ही उसने बोतल उनको दे दी वह भी बहुत प्यासे थे पानी पीकर उन्होंने शुक्रिया कहा।
कुछ देर तक चुप रहने के बाद महिला मुझसे बातें करने लगी बाजार आई थी खरीददारी करने यहाँ सामान बहुत अच्छा मिलता है मैने पूछा बच्चों के लिए खरीदने आई हैं अरे नहीं अपने शौहर के लिए कुर्ता पैजामा ,अपने लिए सूट वह मुझे दिखाना चाहती थी लेकिन मैने मना कर दिया खोलो नहीं तह खराब हो जायेगी अब मेरा प्रश्न था आपके बच्चे उसके चेहरे पर मोहक मुस्कराहट आई मेरा बेटा दुबई में काम करता है और सपनों में खो गयी उसने बताया हमारी कर्दम पूरी में झुग्गी थी शीला अम्मा ने झुग्गियां हटाई बदले में हमें खिचड़ी पुर में प्लाट दिए हमें कुछ नहीं करना पड़ा ट्रकों से हमारा सामान पहुंचवाया हम झुग्गी में लगा सारा सामान साथ ले आये यहाँ अपनी झुग्गी फिर से बसा ली आपको तो वहां पक्के मकान दिखाई देंते होंगे पहले बुरा हाल था हमने जंगल बसाया है धीरे -धीरे मयूर विहार बसा है अब बड़े लोग वहाँ रहते हैं।
मुझे उनकी झुग्गियों में रूचि नहीं थी हाँ उसके बेटे के दुबई जाने में रूचि जगी उसने बताया उसका बेटा पढ़ने में बहुत अच्छा था उसका दाखिला माडल स्कूल जो गुरूद्वारे के पास मयूर विहार टू में है हो गया फीस नहीं थी वरदी भी स्कूल से मिलती थी बहन मेरी ,बेटे ने बिना ट्यूशन के बारवीं में टाप किया अखबार में फोटो छपी थी | हमारी आगे पढ़ाने की हिम्मत नहीं थी ये सामान ले जाने वाला रिक्शा चलाते हैं मालिक की दूकान में परचून का सामान तुलवा कर फ्लैटों में पहुंचाते हैं मेरा बच्चा दिल्ली के कालेज् में पढ़ना चाहता था वहाँ बहुत बड़े कालेज है बस अड्डे से आगे दाखिला हो गया दो हजार साल भर की फ़ीस जमा हुई मेरे शौहर ने कहा भूखा रहूंगा और मेहनत करूंगा तुझे जितना चाहेगा पढ़ाऊँगा बिजनेस की पढाई करता था में समझ गयी दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में बी काम करता होगा लो जी पढाई खत्म भी नहीं हुई होगी नौकरी दुबई की मिल गयी उन्ही की टिकट बस पढाई पूरी करनी थी माँ का चेहरा गर्व से तन गया मेरा बच्चा जब परदेस गया बहुत जी कटा पडोस वालों ने ढोल बजवाया बेटे के गले में माला डाल कर विदा किया यह बेटे को हवाई जहाज में बिठा कर आये रोते रहे काम पर तो जाना था मालिक ने कहा मियाँ तकदीर वाले हो तुम्हें भगवान ने ऐसा बेटा दिया तुम भी बहुत अच्छे इन्सान हो।
बेटे ने भी अपना फर्ज निभाया उसने घर पक्का बनवा दिया नीचे की मंजिल हम दोनों के लिए बीच की मंजिल में बड़ी बैठक ऊपर दो कमरे हम खुश थे ऊपर हमारे बेटे बहु रहेंगे दो बार आया तीसरी बार हमारे लिए टेलीविजन और भी काफी सामान लाया उसने बताया वह जिस कम्पनी में काम करता है उस मेम का बिजनेस में सांझीदार एक शेख है दूबई में वहीँ का शेख सांझीदार बनाना पड़ता है मेडम का व्यापार विदेश में भी है उसने मेडम को समझाया तुम्हें इससे अच्छा शौहर नहीं मिलेगा जबकि वह मेरे बेटे से तीन साल बड़ी है मैंने चौंक कर उसकी तरफ देखा छोटे कद की सांवली महिला थीं चेहरे पर चेचक के बहुत हल्के दाग लेकिन चेहरे पर भोलापन था। उसने गर्व से बताया आप मुझे मत देखिये ये मेरे अब्बा के दोस्त के बेटे थे उनकी मौत के बाद अब्बा ने सहारा दिया था अब्बा ने मेरे रश्ते की बात चलाई इन्होने मना नहीं किया अब्बा की छोटी सी खेती थी। बेटा बहुत खूबसूरत नौजवान है सिर पर घुंघराले बालों का गुच्छा वह कुछ देर के लिए चुप हो गयी बेटा मेरे शोहर की हुबहू कापी है जब पढ़ता था बिलकुल सूखा था उसने लम्बी सांस ली कुछ देर बाद उसने रुक कर कहा वह फिरंगन के साथ आया था उसने बताया मैडम कनाट प्लेस के होटल में ठहरी हैं आपसे कुछ बात करना चाहती हैं शर्त रखना चाहती हैं हमें हमारा लड़का टैक्सी में ले गया मेडम ,हमारी टूटी फूटी भाषा बोल लेती थी लेकिन जो वह कह रहीं थी हमारा लड़का हमें समझा रहा था।
मेडम ने साफ़ कहा हम मेरिज करना चाहते है लेकिन मेरी शर्त है इसे आपसे रिश्ता खत्म करना पड़ेगा कोई रिलेशन नहीं आपका हमारा बहुत फर्क है हम विदेश में भी बस सकते हैं न आप हमारे यहाँ आयेंगे न हम आपके यहाँ मैने आपके लड़के को पहले बता दिया है आप सोच कर कल तक बता दें मेरे दिमाग में एक सवाल आया यदि मेरा लड़का आपसे निकाह कबूल न करे आप इसे अपनी कम्पनी से निकाल देंगी वह मेरी तरफ देखती रही जब तक मुझे इस जैसा इंचार्ज नहीं मिल जाता तब तक नहीं निकालूंगी हम घर आ गये शाम को नफीस घर आया उसने कहा मेरे भविष्य का सवाल है मेरी जिन्दगी बन जायेगी मैं कीड़े मकोड़ों जैसी जिन्दगी नहीं जी सकता पैसे से आपकी मदद करता रहूंगा कभी पीठ नहीं फेरूंगा मेडम की कम्पनी मैं चलाता हूँ अम्मी , अब्बू मेरे सपने हैं इन्हीं को पूरा करने मैं पढ़ा इन्होने कहा हमने तेरे पर ख़ास खर्चा नहीं किया था हमारी ओकात भी नहीं है तूने हमारे लिए बहुत कर दिया तू खुश रह यही हमारी दुआ है मेरा मन डोला क्या तू हमें अपने बच्चे दिखाएगा बेटे ने कहा तुम चिंता मत करो जब होंगे मैं फोटो भेज दूंगा बेटा हमारे मरने पर जनाजे को कंधा कौन देगा मेरे शौहर ने मुझे डांटा जनाजे को क्या पता कौन कंधा दे रहा है सपुर्द तो ख़ाक में होना है ज़ाते समय बेटा उदास था हमारे घर फोन लगवा गया।
फोन की दो चार बार घंटी बजी बेटे ने निकाह की सूचना दी थी मैं अकेली बैठी बधाई गाती रही। मेरे शौहर ने अपने ठेला रिक्शा का ताला खौला उसमें तेल गिरीस लगाया मैने बहुत कहा था इसे बेच दो अब इसकी क्या जरूरत है यह चुप रहते घर में ऊपर के हिस्से में हमने किरायेदार रख दिए खर्चे की कमी नहीं थी फिर रिक्शा क्यों निकाला कारण मुझे नहीं समझया यह अपने पुराने सेठ के पास गये दुआ सलाम के बाद पूछा आप मुझे काम पर रखेंगे तुम्हारा लड़का तो बहुत अच्छा कमाता है इन्होने सारा किस्सा उसे ब्यान किया सेठ जी की आँखों में नमी आ गयी वह बोले तुमने सही किया मैं मेरे बच्चे तुम्हारे साथ हैं तुम्हे रिक्शा खींचना नहीं पड़ेगा सुबह आकर दूकान खोलो यहाँ बैठो सामान तुलवा कर रिक्शा से भिजवाओ सब काम ठीक चल रहा है मेरा काम बढ़ता जा रहा है तुम जैसे भले आदमी की जरूरत है। नहीं ,आप मुझ पर मेहरबानी कर रहे हैं दूकान मैं ही खोलूंगा राशन का समान तुलवा कर फ्लैटों मैं पहुंचाऊगा जब तक शरीर चलता है यही करूंगा आगे आप जो कहेंगे।
जब घर लौट कर आये मुझे बताया पूछा मैने ठीक किया बहुत अच्छा किया घर बैठे -बैठे जंग लग जाती जो पैसा बेटे ने बैंक में डलवाया है उसे हम ऐसे ही पड़ा रहने देंगे उसने उस पर जो हमारा कर्ज था सूद समेत कई गुना लौटा दिया हमें जो किराया मिलता है उसे बुरे समय के लिए जमा करते रहेंगे तुम जो लाओगे उससे अच्छा खर्च चलेगा | उसने पूछा आप कभी गाजी पुर की तरफ गयी होगीं वहां चौराहे पर ढलान है वहीँ पास के बने फ्लैटों में यह सामान पहुँचाने जाते है वहाँ चढ़ाई है पर जो इनको देखता है यहाँ तक उधर से गुजरने वाले तम्पो के ड्राईवर पीछे से रिक्शा को धक्का देकर रिक्शा चढ़ाने में मदद करते हैं।
मैने पूछा तुम्हारे बेटे के बच्चे हैं क्या वह तुम्हें दिखाने लाया हाँ दो जुड़वा हैं। वह बीबी के साथ घूमने आया था। उसने हमें कनाट प्लेस के होटल के पार्क में बुलाया। मैडम तो नहीं आयीं परन्तु बेटा बच्चों को दिखाने लाया। दोनों लड़के भूरे बंदर जैसे लग रहे थे। पार्क में खेलते रहे हम कुछ देर बाद लौट आये। बेटा इसके बाद कभी नहीं आया। दुबई में जानकारों का लड़का काम करता है उससे पता चला वह सब मैडम के देश जाकर बस गए। आपको तकलीफ हुई , नहीं बिलकुल नहीं। शौहर कई घरों में सामान पहुंचाने जाते हैं। उनमें बहुत से पढ़े लिखे लोग अकेले रहते हैं। उनके बच्चे दूसरे देशों में बस गए। हम तो गरीब अनपढ़ लोग थे। अकेले आये है अकेले जाना है। रशीदन के चेहरे की आभा देख कर मैं हैरान रह गयी पर उदास हो गयी एक अनजान परिवार मेरे जेहन से जुड़ गया।
डिस्क्लेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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