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मिसाइल प्रौद्योगिकी नियन्त्रण व्यवस्था ( एमटीसीआर ) की सदस्यता भारत का सफल कदम

Vichar Manthan

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मोदी जी की हाल की संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की यात्रा के दौरान स्पष्ट हो गया था भारत को मिसाईल टेक्नोलोजी नियन्त्रण व्यवस्था की सदस्यता हासिल हो जाएगी| 27 जून विदेश सचिव एस जयशंकर के फ्रांस ,नीदरलैंड और लक्जमबर्ग के राजदूत की उपस्थिति में एमटीसीआर में शामिल होने वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर भारत संगठन का 35वां सदस्य देश बन गया | सियोल में भारत को चीन के विरोध के कारण एनएसजी की सदस्यता हासिल नहीं हुई विरोध भी उन सदस्यों द्वारा अधिक किया गया था जिनके यहाँ चीन ने निवेश किया है वह चीन के दबाब में थे |चीन एक ही जिद पर अड़ा रहा भारत पहले एनटीपी पर हस्ताक्षर कर सदस्यता की शर्त पूरी करे |एनएसजी की सदस्यता न मिलने से मोदी जी की विपक्ष द्वारा जम कर आलोचना की गयी इसे उनकी कूटनीतिक हार माना कुछ नें उपदेश भी दिया कूटनीति में कान खुले , मुँह बंद रखना चाहिए लेकिन भारत को इस दिशा में विकसित देशों का समर्थन मिला |ज्यों -ज्यों भारत का कद बढ़ता जाएगा एक दिन एनएसजी की सदस्यता भी मिल जायेगी भारत को एमटीसीआर की सदस्यता प्राप्त करने में कामयाबी मिली जबकि चीन अभी तक सदस्य नहीं बन सका | 2004 में चीन ने सदस्यता लेने की कोशिश की थी लेकिन उस पर सदस्य देशों की आम सहमती नहीं बन सकी क्योंकि वह छुपे ढंग से पाकिस्तान और नौर्थ कोरिया को मिसाईल बेच रहा है| पाकिस्तान में आतंकवाद पल बढ़ रहा है नार्थ कोरिया में ताना शाह है |चीन की यह भी कूटनीतिक चाल थी उसे एमटीसीआर सदस्यता मिले तब भारत को एनएसजी की सदस्यता का वह समर्थन करे |
भारत के एमटीसीआर के सदस्य बनने से भारत एवं अमेरिका के बीच रक्षा व्यापार एवं तकनीकी हस्तांतरण का मार्ग सुगम हो जाएगा | भारत उच्च स्तर की मिसाईल टेक्नोलॉजी को खरीदने में समक्ष होगा | हमें मानवरहित ड्रोन की तकनीक भी मिल जायेगी हमारे देश में रशिया के सहयोग से ब्रह्मोस (सुपरसानिक क्रूज प्रक्षेपास्त्र) का निर्माण किया गया है |यह कम ऊचाई से तीव्रता से उड़ान भरता है रडार में नजर नहीं आता इसे जमीन,हवा या सबमैरीन या युद्ध पोत से चलाया जा सकता है | भारत ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें बेच सकेगा लेकिन शर्त के साथ मिसाइल का मारक क्षमता 300 किमी तक हो तथा वह 500 किग्रा तक हथियार ले जाने में ही सक्षम हो। हमें हथियारों के ट्रेड फेयर की प्रदर्शनी में रखने का अवसर मिलेगा | हम ब्रह्मोस जैसी मिसाईल बेच भी सकेंगे
MTCR की स्थापना अप्रेल 1987 में की गयी थी यह देशों का स्वैच्छिक स्वयंसेवी संगठन है पहले कनाडा , फ्रांस जर्मनी इटली जापान ब्रिटेन और यूएस ने मुख्यतया मिल कर स्थापना की थी आज हाल ही में भारत को सदस्यता देने के बाद इसके मेंबर देशों की संख्या 35 हो गयी है |इस संगठन का उद्देश्य मिसाईलों अन्य मानव रहित ऐसी तकनीक जिसमें बड़े पैमाने पर संहारक क्षमता है जैसे ड्रोन इनका सफलतम उपयोग अफगानिस्तान में आतंकवादियों को खत्म करने के लिए किया गया है ,रासायनिक और बायलोजीकल ( रोगों के बैक्टीरिया युक्त जैविक हथियार ) ,कैमिकल हथियार जिनका प्रयोग ईराक के तानाशाह सद्दाम हुसेन ने अपने क्षेत्र के खुर्द विद्रोहियों पर किया था जिसका प्रभाव ईरान की सीमा पर बसे छोटे से गाँव के लोगों पर भी पड़ा था मैने उन लोगों को देखा था वह भुने हुए बैंगन की तरह काले पड़ गये थे | इराक ने नार्थ कोरिया से मिसाईल खरीदीं थी जिनका वजन कम कर सीधी तेहरान पर मारीं थी उसके बाद ईराक और ईरान का युद्ध खत्म हुआ था| आज कल मिसाईल की मारक क्षमता का प्रदर्शन सीरिया पर हो रहा है | तथा परमाणु हमलो के किये जाने वाले हथियारों के प्रयोग को नियंत्रित करना है |सभी एमटीसीआर में निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं सदस्यों में नियमित रूप से प्रासंगिक राष्ट्रीय निर्यात लाइसेंस मुद्दों के बारे में जानकारी का भी आदान-प्रदान होता है यद्यपि यह संधि नहीं है न ही इसके सदस्य देश किसी कानून से बंधें है |
31 जनवरी 1992 में की अपनी शिखर बैठक में एमटीसीआर के मुख्य सदस्यों ने सामूहिक विनाशक हथियारों (WMD) की तरफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का ध्यान खींचा |यह सभी हथियारों को राष्टों की सुरक्षा और विश्व शान्ति के लिए खतरा मान कर इनको प्रतिबंधित करने के लिए दुनिया के प्रमुख मिसाईल निर्मातों से आग्रह किया गया | संस्था का संयुक्त राष्ट्र संघ से सीधा सम्बन्ध न हो कर औपचारिक सम्बन्ध है | 9/11 की संयुक्त राज्य अमेरिका पर अलकायदा द्वारा किये गये हमले की दुखद घटनाओं के बाद सितम्बर 2001 में संगठन ने जन संहारक हथियारों को आतंकवादी समूहों के हाथों में पड़ने के खतरे पर भी विचार किया अत: खतरे का मुकाबला करने के लिए सतर्कता बरती जाये | 2008 में भारत उन पांच देशों में शामिल हो गया था जो एक तरफा एमटीसीआर के समर्थक हैं जिनमें इजराईल भी आता है |अटल बिहारी जी के कार्य काल में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू हुई थी अक्तूबर माह में 2016 में साऊथ कोरिया में होने वाली बैठक में अब भारत भाग लेगा |यह भारत की कूटनीतिक विजय की तरफ बढ़ता कदम है |
श्री डॉ शंकर सिंह जी ने मेरे लेख की प्रतिक्रिया में कुछ विचार रखे आप भी देखे ” . I would like to add a few points about our missile programme. Our missile programme is entirely indigenous.e have not received any help from any other country. We have accomplished this inspie of all the obstructions created by advanced countries. You might be knowing that USA imposed severe sanctions against India, after we conducted Pokharan II Shakti experiment during Vajpayee ji ’s Prime Ministership. We have faced ”
डॉ शोभा भारद्वाज

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