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हमारी आजादी की कानूनी कहानी

कानूनी मुद्दे

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बीसवीं शताब्दी के शुरुआती दौर में महात्मा गांधी के नेतृत्व में अहिंसा के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम ने एक अभूतपूर्व मोड़ लिया। जिसके उपरांत भारत में बढ़ते दबाव को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ने का निर्णय लिया। भारत छोड़ने की प्रक्रिया द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शुरू हुई, लेकिन ये प्रक्रिया केवल स्वतंत्रता संग्राम तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया भी थी जो बहुत ही व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई.

गवर्नर जनरल माउंट बेटन ने ट्रांसफर ऑफ पॉवर की शुरुआत जून 3 प्लान के द्वारा की। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इण्डिया लॉर्ड लिस्टोवेल ने ब्रिटिश संसद में जुलाई 3,1947 को भारतीय स्वतंत्रता प्रस्ताव पेश किया, जो कि 16 जुलाई 1947 को पास हो गया। 17 जुलाई 1947 को रॉयल स्वीकृति प्राप्त होने के बाद भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 पूर्णतः लागू हो गया।

ट्रांसफर ऑफ पॉवर की प्रक्रिया में सबसे पहली रुकावट यह थी कि पॉवर किसको ट्रांसफर की जाए! मुस्लिम लीग के प्रस्ताव पर ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अंतर्गत भारत के विभाजन की बात करते हुए, दो स्वतंत्र अधिराज्य, भारत और पाकिस्तान का सृजन किया व सम्पूर्ण सत्ता, दोनों देशों के संविधान सभाओं को दे दी गई।

दोनों देशों के संविधान सभाओं को अधिनियम ने 1947 के अनुछेद के 8(1) के अंतर्गत उस देश के संविधान गठन का अधिकार दिया गया। इस अधिनियम के दौरान ये घोषित कर दिया गया कि 15 अगस्त 1947 के उपरांत ब्रिटिश संसद का क्षेत्र अधिकार भारत और पाकिस्तान के ऊपर से समाप्त हो जाएगा। अनुछेद 7 (1) (अ) के तहत महामहिम की सरकार और ब्रिटिश सरकार भारत और पाकिस्तान के प्रति या इसकी सुरक्षा के प्रति किसी भी रूप से उत्तरदायी नहीं होगी।

अधिनियम 1947 के अनुसार केन्द्रीय विधानसभा और राज्य परिषद दोनों स्वतः ही भंग हो गई और दोनों देशों की सविधान सभाएं, अपने अपने राज्यों के लिए विधानमंडल की शक्तियों का प्रयोग करेंगे। इसी के साथ भारत की संप्रभुता जो कि 1847 में ब्रिटेन की महारानी को दे दी गई थी, वो वापस भारत के संविधान सभा को प्राप्त हुई। जिसके आधार पर भारत का संविधान 25 नवंबर 1949 को बनके तैयार हो गया और 26 जनवरी 1950 को एक गणराज्य भारत की स्थापना हुई।

ब्रिटिश संसद से पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 भारत के संविधान सभा के शक्ति का स्रोत था, जिसके आधार पर भारत का संविधान लिखा गया। प्रतीकात्मक रूप से संविधान का प्रस्ताव हम भारत के लोग से शुरू होता है, परन्तु कानूनी रूप से संविधान सभा को संविधान लिखने का अधिकार भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अंतर्गत ही प्राप्त होता है। इस ट्रांसफर ऑफ पॉवर को संविधान द्वारा भी पहचान प्राप्त है।

भारत का संविधान अपने अनुछेद 395 के द्वारा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को निरस्त करता है। इसमें किसी भी बात का संदेह नहीं है कि भारत की स्वतंत्रता किसी की भेंट नहीं, अपितु वर्षों के स्वतंत्रता संग्राम का परिणाम थी, लेकिन यह भी विचारणीय है कि अगर अंग्रेज बिना किसी व्यवस्थित तंत्र के भारत को छोड़ कर चले जाते तो यहां अराजकता का माहौल बनना भी सुनिश्चित था।

 

डिस्क्लेमर- उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉटकॉम किसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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