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कोरोना: न्यायपालिका और कार्यपालिका

घूमता आइना

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लम्बे लॉकडाउन  और इस अति आत्मविश्वास के कारण ज्यादातर लोगों ने  जनवरी  2021 के आरंभ से ही सहज और सामान्य जीवन जीना शुरु कर दिया था. जनमानस में  ऐसा माना  जाने लगा था  कि कोरोना  पर भारत ने विजय प्राप्त कर ली है।  इसी बीच कोरोना के लिए दो भारतीय वैक्सीन भी  उपलब्ध हो चुकी थी। इस समय दुनिया के कई विकसित देशों में कोरोना महामारी की दूसरी लहर चल रही थी और जिससे व्यापक जनहानि हुई थी.

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का आगाज मार्च के मध्य में शुरू हुआ और होली का त्यौहार आते आते इसका व्यापक असर दिखाई पड़ने लगा था, जिसके कारण  केंद्र द्वारा व्यापक दिशा निर्देश दिए गए थे और राज्य सरकारों को  इस नई चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा गया था.  अप्रैल में कोरोना महामारी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया . कोरोना वायरस  का नए  वेरिएंट  ब्रिटेन और साउथ अफ्रीका के थे जो अपेक्षाकृत बहुत तेज  संक्रमण फैला रहे थे.  इसके अलावा पश्चिम बंगाल और विशाखापट्टनम  से एक नए वेरिएंट का भी आगाज हुआ जिसे  B.1.617 कहा  गया है, वह विश्व के 44 देशों में देखा गया है  जहां इस वैरिएंट ने   अत्यंत विकराल रूप धारण किया और व्यापक जनहानि की.

भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में जहां अमेरिका की तुलना में जनसंख्या घनत्व बहुत ज्यादा है, इस तरह की महामारी फैलने की संभावना कहीं ज्यादा होती है, कोरोना  वायरस के कई वेरिएंट्स  और डबल  म्यूटेंट  ने मिलकर भारत में स्वास्थ्य ढांचे को चरमरा दिया.  इसके कारण प्रारंभ में  दिल्ली, महाराष्ट्र, और केरल जैसे राज्य लड़खड़ा गए वहीं बाद में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु भी इससे बुरी तरह से प्रभावित हो गए. ज्यादातर राज्य ऑक्सीजन की कमी से जूझते देखते गए।

देश में ऑक्सीजन की कमी के शोर के कारण लोगों ने ऑक्सीजन का अनावश्यक भंडारण शुरू कर दिया. आपदा में अवसर तलाशने वाले कई  जमाखोर  सक्रिय हो गए और देखते ही देखते ऑक्सीजन सहित कई महत्वपूर्ण दवाइयों की भी कालाबाजारी शुरू हो गई.  इतनी भयंकर महामारी के समय में  भारतीय समाज का इतना गिरा हुआ  क्रूर चेहरा  शायद पहले कभी नहीं देखा गया.

विभिन्न उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में  कोरोना  महामारी  को  लेकर  कई जनहित याचिकाएं दायर की गई.  कुछ उच्च न्यायालयों  ने मामलों का स्वत संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू कर दी. इस समय सर्वोच्च न्यायालय देश की वैक्सीन नीति को लेकर सुनवाई कर रहा है जिसके लिए केंद्र सरकार ने एक हलफनामा दाखिल किया है.  इस हलफनामा में केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि न्यायपालिका को अति उत्साह से बचना चाहिए और ऐसे मामले जिनमें विशेषज्ञ परामर्श की आवश्यकता होती है, अपने हाथ में लेने से बचना चाहिए.

न्यायपालिका को अपना संवैधानिक उत्तरदायित्व निभाते हुए कार्यपालिका को दिशा निर्देश देने का अधिकार है लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि न्यायपालिका हर मामले की विशेषज्ञ नहीं हो सकती और  केवल निर्देश दे देने मात्र से किसी बड़े संकट का समाधान नहीं हो सकता क्योंकि हर संकट के लिए विशेषज्ञ नीति और क्रियान्वयन की आवश्यकता होती है. संकट के समय जहां न्यायपालिका की सक्रियता की प्रशंसा की जानी चाहिए, वहीं  न्यायपालिका से यह अपेक्षा है कि वह कार्यपालिका के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करके संकट के समाधान में व्यवधान न बने.

 

डिस्क्लेमर- उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट किसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है। 

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