Menu
blogid : 12171 postid : 1335822

“मौत के सामान जैसा है”

! अब लिखो बिना डरे !

  • 580 Posts
  • 1343 Comments

वो दर्द का एक लम्हा तूफान जैसा है,
मेरे लिए तो मौत के सामान जैसा है !

भूलने की कोशिशें नाकाम ही रही,
गहरे लगे एक ज़ख्म के निशान जैसा है!

लूट लिया जिसने चैन-ओ-सुकून सारा,
नजरों में हाय सबके भगवान जैसा है !

ये ठीक है मुकद्दर सबका नहीं बुलंद ,
कई बार टूटते हुए अरमान जैसा है !

जो नोंच खाये ‘नूतन’ मिलकर करे दगा ,
इंसान के इस जिस्म में शैतान जैसा है !

शिखा कौशिक नूतन

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply