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सुशांत की मौत: तेजी से बोला गया झूठ सच नहीं दबा सकता

तीखी बात

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वो 74 साल का पिता जिसका बेटा बुलंदियों को छू रहा था लेकिन अचानक आसमां का तारा बन गया. वो बहनें जो इस बार रक्षाबंधन पर अपने इकलौते भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध पाईं। वो सुशांत सिंह राजपूत आज मरकर भी पूरी दुनिया की आंखों का तारा बना है…. हर कोई चाहता है कि सुशांत की मौत का असली सच सामने आए। और अब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला देकर ये दिखा दिया है कि झूठ कितना भी तेज से बोला जाए लेकिन सच को दबाया नहीं जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले मैं बड़ा ही हैरान था कि मुंबई में सुशांत की मौत हुई और पिता के आरोपों के बाद भी मुंबई में 40 दिन के बाद भी एक FIR तक दर्ज नहीं की गई। तो सवाल तो बनता है कि जब कोई FIR नहीं हुई तो मुंबई पुलिस जांच किस बात की कर रही थी। क्यों झूठ मीडिया पर आकर बोला जा रहा था जबकि सच तो ये है कि बिना FIR के जांच हो ही नहीं सकती। पूरा देश जब कह रहा है कि सुशांत की मौत में कुछ तो गड़बड़ है। तो क्या महाराष्ट्र सरकार का फर्ज नहीं बनता था कि सीबीआई को जांच दे देनी चाहिए थी। क्यों सुशांत के केस को लटकाया, भटकाया और अटकाया जा रहा था? सवाल तो पूछा जाना चाहिए।

और जब कोई जवाब नहीं मिल रहा था तो बात बिहार से होते हुए दिल्ली तक पहुंच गई। और फिर सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की वो एक नज़ीर है उन लोगों के लिए जो सुशांत के केस को अटकाना, लटकाना और भटकाना चाहते थे आज सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में कहा कि “जब सच का सूर्य की किरणों से सामना होता है तो ज़िंदगी के रहते भी और मरने के बाद भी इंसाफ की आस जगे और जो चले गए हैं। दुनिया से कम से कम वो आराम से सो सकें इसलिए सच का आना ज़रूरी है। आप जानते हैं कि आखिर ये बात सुप्रीम कोर्ट को क्यों कहनी पड़ गई। इसकी वजह है महाराष्ट्र पुलिस की नाकामी। जब दिल में कोई खोट नहीं था तो क्यों पूछताछ के नाम पर सिर्फ ढोंग होता रहा जबकि मीडिया में एक से बढ़कर एक सबूत सामने आते गए। लेकिन महाराष्ट्र पुलिस अपनी ढपली अपना राग अलापती रही।

फिर जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना जजमेंट देकर महाराष्ट्र पुलिस का चेहरा शर्म से झुका दिया तो फिर कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर है। साहब मंजूर तो करना ही पड़ेगा और दूसरा कोई चारा भी तो नहीं है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपील के रास्ते भी बंद कर दिए हैं।

सुशांत की मौत से जुड़े कई बड़े ऐसे सवाल हैं जिनकी गुत्थी शायद सुलझी तो जवाब ज़रूर सामने आएंगे

1. सुशांत की लंबाई करीब 6 फुट थी तो उसने 6 फुट ऊपर पंखे से लटककर कैसे फांसी लगा ली.. जबकि नीचे बेड रखा था और फंदे की तरह प्रयोग हुआ कुर्ता भी ज्यादा मजबूत नहीं था।

2. जब देशभर में लॉकडाउन चल रहा था तो सबसे पहले सुशांत के कमरे तक पहुंचने वाले शख्स को कैसे 10 मिनट में कोई ताले को तोड़ने वाला शख्स मिल गया।

3. सुशांत को फांसी पर लटकता देख बॉडी को उतारने से पहले पुलिस को क्यों नहीं बुलाया गया, और इमोशन में उसे उतारा भी गया तो उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया

4. सुशांत की मौत से पहले क्या सुशांत के घर पर कोई पार्टी हुई थी?

5. सुशांत की मैनेजर दिशा की मौत का राज क्या है? क्या कोई ताकतवर नेता का बेटा इस पूरे केस में शामिल है इसलिए मौत की मिस्ट्री को छुपाया जा रहा है?

6. सुशांत के अकाउंट के पैसों का क्या हुआ क्या उनकी गर्लफ्रेंड और इस केस में आरोपी रिया चक्रवर्ती ही असली गुनहगार हैं?

7. अगर सुशांत ने डिप्रेशन मे ंआकर खुदकुशी की तो वो जब डिप्रेशन में क्यों नहीं हुआ जब वो टेलीविज़न छोड़ने के बाद एक साल तक फिल्मों में आने के लिए खाली बैठा था। और सुशांत के अकाउंट में जमा पैसे कहां गए

8. क्या मौत से संबंधित कोई ऐसी बात थी जो सुशांत जानता था और उसकी वजह से कुछ लोग फंस जाते इसलिए उसकी हत्या कर उसे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया?

 

अभी तो ऐसे बहुत से सवाल हैं जो हर देशवासी पूछ रहा है और यही देश के सवाल सुशांत के पिता को ताकत दे रहे हैं। सुशांत के परिवार को 67 दिन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने न्याय की उम्मीद जगाई है।और हर किसी को यही उम्मीद है कि सीबीआई अब सुशांत की मौत का राज ज़रूर सामने लाएगी। ये तो ज़ाहिर है कि अपनी फिल्मों में ज़िंदगी जीने की सीख देने वाला शख्स इतनी घुटन के साथ नहीं मर सकता। कुछ तो बात है जो वो अपनी ज़ुबां से नहीं कह पाया। क्या वो बात देश तक पहुंचेगी और इसी बात का देश को इंतज़ार रहेगा

-शशांक गौड़

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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