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हिंदी की पाठशाला

Poem

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हिन्दी की पाठशाला
हिन्दी अध्यापिका के लिए इश्तहार था आया,
हमने भी अपना हौसला बढाया और, साक्षात्कार के लिए कदम बढाया ।
उन्हे भी हमारा अंदाज पसंद आया,
और अगले हफ्ते से ही हिन्दी पढाने का हुक्म फरमाया ।
फिर क्या था हमने भी अपनी सारी जुगत लगाई,
हिन्दी सिखाने की सारी तरकीब अपनाई।
पर हाय री किस्मत ! जब हिन्दी सिखाने की यहाँ कोई किताब न पाई,
तब हमने अपने प्यारे गूगल को आवाज लगाई।
खैर पाठ बनाए हमने और शुरू हो गई पाठशाला,
जिसमें थे कम्पनी के अफसर आला आला।
पहले दिन का पाठ सभी को बहुत भाया,
सभी ने अपनी पसंद का वाक्य बतलाया।
किसी को आप कैसे हैं ? मै अच्छा हूँ, बहुत भाया,
तो किसी को अच्छा बच्चा का रिदिम रास आया।
एक मोहतरमा को तो अच्छा चलते हैं का जुमला बहुत भाया।
और उन्होने ये जाकर अपनी कार्य स्थली में दोहराया।
कहाँ मिलोगी बसंती ?पलट कर जवाब ये आया।
कुछ समझ न पाई वो झट नोट डाउन किया और आकर हमें बतलाया।
एक दिन पाठशाला में हमने समझाया,
हिन्दी में बडो को बहुत इज्जत देते हैं इसलिए उन्हे एकवचन में नहीं बहुवचन में बोलते हैं।
जैसे माई फादर को मेरा पिता जी नहीं मेरे पिताजी बोलेंगे।
चलिए इस पर अब इस पर एक नया वाक्य बनाएँगे ।
वाक्य बनाया गया मेरे माताजी …….. हमने कहा रुकिए रुकिए,
मेरे माताजी नहीं मेरी माताजी कहिए।
तभी एक महाशय फरमाते हैं,
क्यों आपके यहाँ माताजी की इज्जत नही करते हैं,
इसलिए आप उन्हे बहुवचन में नही एकवचन में बोलते हैं ।
मैं चौकी, क्षण भर सोचा, फिर उन्हे स्त्रीलिंग का बहुवचन समझाया।
एक बार हमने कहा हार्ड वर्किंग को मेहनती कहते हैं ।
तो आज इस पर हम वाक्य बनाते हैं।
वाक्य बनाया गया, माताजी चिडिया बहुत मेहनती होती हैं।
हमने हँस कर कहा वाक्य तो आपका सही है।
पर चिडिया को इतनी इज्जत में न तोलिए,
कृपया उन्हे जी लगाकर तो न बोलिए।
हमने कहा चलिए आपको चिडिया के साथ साथ,
अन्य जानवरो के नाम भी बतलाते हैं।
तभी एक महोदय मुस्कुराते हुए बतलाते हैं,
शेरखान, बघीरा,मोगली को तो हम भी पहचानते हैं,
अरे ! थोरी-थोरी हिन्दी हम भी जानते हैं।
एक बार की बात, हम पढा रहे थे भूतकाल का पाठ,
थोडा मुश्किल तो लग रहा था, पर सबको समझ आ रहा था।
हमने पूछा , आप कल कहाँ गए थे? उत्तर बनाइए।
उत्तर आया, हम कल स्विमंग पूल गए थे।
हमने खुश होकर कहा, वाह वाह बहुत अच्छा।
तभी वे बोले, मैडम शालिनी हमें मत बहकाइए,
पहले हमे स्विमंग पूल की हिंदी तो बतलाइए।
हमने कहा स्विमंग पूल को हिंदी मे तरणताल कहते हैं,
पर आजकल हिंदी में कुछ शब्दो को अंग्रेजी में ही बोलते हैं।
हिंदी बोलने वाला भी तरणताल समझ नही पाएगा,
इसलिए आपको स्विमंग पूल का शब्द ही काम आएगा।
भारत में उर्दु, फारसी,अंग्रेजी, विदेशी जो भी आया है,
हिंदी ने सबको बडे प्यार से गले लगाया है।
पर ये सब कहते कहते हमारा मन कह उठा,
हे हिन्दी ! तू सबको अपनाना, तू सबको अपने मे समाना,
पर सबको अपने मे समाते समाते खुद उनमे विलय मत हो जाना।
खुद उनमे विलय मत हो जाना।
शालिनी गर्ग

हिन्दी की पाठशाला

हिन्दी अध्यापिका के लिए इश्तहार था आया,

हमने भी अपना हौसला बढाया और, साक्षात्कार के लिए कदम बढाया ।

उन्हे भी हमारा अंदाज पसंद आया,

और अगले हफ्ते से ही हिन्दी पढाने का हुक्म फरमाया ।

फिर क्या था हमने भी अपनी सारी जुगत लगाई,

हिन्दी सिखाने की सारी तरकीब अपनाई।

पर हाय री किस्मत ! जब हिन्दी सिखाने की यहाँ कोई किताब न पाई,

तब हमने अपने प्यारे गूगल को आवाज लगाई।

खैर पाठ बनाए हमने और शुरू हो गई पाठशाला,

जिसमें थे कम्पनी के अफसर आला आला।

पहले दिन का पाठ सभी को बहुत भाया,

सभी ने अपनी पसंद का वाक्य बतलाया।

किसी को आप कैसे हैं ? मै अच्छा हूँ, बहुत भाया,

तो किसी को अच्छा बच्चा का रिदिम रास आया।

एक मोहतरमा को तो अच्छा चलते हैं का जुमला बहुत भाया।

और उन्होने ये जाकर अपनी कार्य स्थली में दोहराया।

कहाँ मिलोगी बसंती ?पलट कर जवाब ये आया।

कुछ समझ न पाई वो झट नोट डाउन किया और आकर हमें बतलाया।

एक दिन पाठशाला में हमने समझाया,

हिन्दी में बडो को बहुत इज्जत देते हैं इसलिए उन्हे एकवचन में नहीं बहुवचन में बोलते हैं।

जैसे माई फादर को मेरा पिता जी नहीं मेरे पिताजी बोलेंगे।

चलिए इस पर अब इस पर एक नया वाक्य बनाएँगे ।

वाक्य बनाया गया मेरे माताजी …….. हमने कहा रुकिए रुकिए,

मेरे माताजी नहीं मेरी माताजी कहिए।

तभी एक महाशय फरमाते हैं,

क्यों आपके यहाँ माताजी की इज्जत नही करते हैं,

इसलिए आप उन्हे बहुवचन में नही एकवचन में बोलते हैं ।

मैं चौकी, क्षण भर सोचा, फिर उन्हे स्त्रीलिंग का बहुवचन समझाया।

एक बार हमने कहा हार्ड वर्किंग को मेहनती कहते हैं ।

तो आज इस पर हम वाक्य बनाते हैं।

वाक्य बनाया गया, माताजी चिडिया बहुत मेहनती होती हैं।

हमने हँस कर कहा वाक्य तो आपका सही है।

पर चिडिया को इतनी इज्जत में न तोलिए,

कृपया उन्हे जी लगाकर तो न बोलिए।

हमने कहा चलिए आपको चिडिया के साथ साथ,

अन्य जानवरो के नाम भी बतलाते हैं।

तभी एक महोदय मुस्कुराते हुए बतलाते हैं,

शेरखान, बघीरा,मोगली को तो हम भी पहचानते हैं,

अरे ! थोरी-थोरी हिन्दी हम भी जानते हैं।

एक बार की बात, हम पढा रहे थे भूतकाल का पाठ,

थोडा मुश्किल तो लग रहा था, पर सबको समझ आ रहा था।

हमने पूछा , आप कल कहाँ गए थे? उत्तर बनाइए।

उत्तर आया, हम कल स्विमंग पूल गए थे।

हमने खुश होकर कहा, वाह वाह बहुत अच्छा।

तभी वे बोले, मैडम शालिनी हमें मत बहकाइए,

पहले हमे स्विमंग पूल की हिंदी तो बतलाइए।

हमने कहा स्विमंग पूल को हिंदी मे तरणताल कहते हैं,

पर आजकल हिंदी में कुछ शब्दो को अंग्रेजी में ही बोलते हैं।

हिंदी बोलने वाला भी तरणताल समझ नही पाएगा,

इसलिए आपको स्विमंग पूल का शब्द ही काम आएगा।

भारत में उर्दु, फारसी,अंग्रेजी, विदेशी जो भी आया है,

हिंदी ने सबको बडे प्यार से गले लगाया है।

पर ये सब कहते कहते हमारा मन कह उठा,

हे हिन्दी ! तू सबको अपनाना, तू सबको अपने मे समाना,

पर सबको अपने मे समाते समाते खुद उनमे विलय मत हो जाना।

खुद उनमे विलय मत हो जाना।

शालिनी गर्ग

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