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बरसात के दिन

saanjh aai

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गाँव में बारिश के दिन

केंचुए भरे आँगन टपकती हुई रसोई

कहाँ बैठें कैसे बैठें की भोजन बन जाए

चूल्हे पर गिरी बूँद को अग्नि मिटा देगी

पर ऊपर गिरी बूँद को कौन रोके ?

पैर के तलवे मे छेद हो गए हैं कुछ ने कहा-

केचुए ने खाया है |

पता नहीं कब खा गया मैंने देखा ही नही

पके खाये हुये आम की गुठलियाँ आंगन के कोने मे रखी हैं

उन पर जमी है मिट्टी की एक परत फिर उसपर बरसाती कीड़ो का ढेर

पीछे वाली कोठरी मे रखा है आलू और प्याज

उसकी दीवारे बरसात से  कट गई हैं वहाँ जाने पर डर लगता है

पर घर के बड़ो ने कहा डरो मत दीवार गिरेगी नही

वो ठीक बोले गिरी नहीं |

बरसात बीत गई ||

– शकुंतला मिश्रा

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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