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मुर्दा देश

आर्यधर्म

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सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, सम्राट अशोक के वीरोचित कर्म की ये भूमि जिसने उन सूरमाओ को पैदा किया जिन्होंने अपने वक़्त की लगभग सारी दुनिया पर राज किया ,वही महान भूमि आज उन् म्लेच्छ विधर्मियो के राज में बेबस है जिन दुश्मनों ने उस विक्रमी साम्राज्य को अपने नापाक षड्यंत्रों और आततायी हमलो से ख़तम कर दिया था . हजार सालो से ये देश हार, नुकसान, ध्वंस, अपमान झेल रहा है अपने राष्ट्र गौरव और आत्मसम्मान को कब का खो चूका ये देश अब उन कायर देश द्रोहियों के हाथ में है जिन्होंने बजाय भारत को खड़ा करने के इंडिया की “खोज” कर डाली और अभी तक इंडिया को ही पालते पोसते हुए भारत के हार निशान को मिटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है.. बड़े ही दुःख और निराशा की बात है की इस दमनकारी नृशंस भ्रष्ट सत्ता को रोकता कोई दीखता नहीं.. एक सौ पच्चीस करोड़ जनसँख्या के इस देश पर जाने कितना बड़ा आघात लगा है की अभी भी एक सर राष्ट्र गर्व में उठता नहीं. लाखो उत्सव धर्मी मनोरंजन, खेल कूद और आमोद प्रमोद के लिए तो चौराहे पर खड़े हो जाते हैं, किसी नेता के जुलूस में शामिल हो अपना मतलब ढूँढने और किसी अभिनेत्री का सजा सजीला बदन किसी शोपिंग मॉल या दुकान में देखने के लिए तो दुनिया के किसी भी कोने में हुजूम लगा देंगे पर देश के लिए सच्ची आवाज़ उठाने वाले के साथ दो कदम भी नहीं चलते. उनके लिए ही लड़ने वाले और उनकी ही भलाई की बात करने वाले के लिए सडको पर नहीं आ सकते, उसीकी जान खतरे में देख कर भी बाहर नहीं आते. यही लोग जब देश अंग्रेजो गुलाम था तभी अपनी ही विषय वासनाओं में लिप्त थे और आज भी वही अपने घरो में घुसकर तमाशा देख रहे हैं. एक साधू जिसका अपना रत्ती भर भी भौतिक स्वार्थ नहीं, एक साधू जिसका स्वयं का खड़ा किया हजारो करोड़ का साम्राज्य जिसपे वो बरसो ऐश कर सकता था, की परवाह न करते हुए मात्र अपने आदर्शो, आत्मा की आवाज़ और राष्ट्र कर्त्तव्य के लिए एक पुरे दानवो के दल से भी भीड़ जाता है, जो गलत को गलत कहने की हिम्मत रखता है, जो देश के प्रति किये गए जान प्रतिनिधियों को उनकी गलतियाँ बताने में कोई गुरेज नहीं करता. जो अपने राष्ट्रीय दायित्व केवल हर जान मंच पर कहता ही नहीं बल्कि उनको स्वयं कर के दिखने का भी हौसला रखता है जो देश के हर नागरिक के लिए इतने बड़े गुंडों के समोह से भी लदन में डरता नहीं.. वो जो हमारे आप के लिए लड़ रहा है.. उसके लिए लोग एक अपनी आवाज़ भी ऊँची नहीं करते, हाथो में मशाल, तलवार, और बन्दूक लेकर उस आतताई का विरोध करना तो दूर है…. पर यह बे-शर्मी की हद है. एक तरफ ये सरकार है जो राज्य निहित सारे अधिकार और सत्ता शक्ति से परिपूर्ण है, जिसके पाले हुए बडबोले कुत्ते, विरोधियो को गाली देने उनको अपमानित करने और उनको ख़त्म करने में भी पीछे नहीं रहते, जिसके साथ दुनिया का सबसे बड़ा काले धन, जिस की संख्या भी जुबान से बोलना भारी है, और इस देश के सबसे ताकतवर व्यक्तियों का भंडार और उसकी ताकत है, जिसके साथ ख़रीदे हुए मीडिया के पशुओं की पूरी फ़ौज है दूसरी तरफ किसी भी धन, बल व अधिकार की क्षमता से रहित अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जैसे साधूवीर हैं जिनके पास लगभग कुछ नहीं है सिवाय सच के!! और वहीँ हम हैं जो झूट में जीते हैं, कायरता, निकृष्टता की जिंदगी जीते हैं और अपने बच्चो के बाप तो बन जाते हैं पर उनके लिए एक साफ़, शालीन, भय रहित, शुचितापूर्ण और सच्चाई से भरा भारत नहीं बना पाते. ये एक सौ पच्चीस करोड़ की जान संख्या मात्र पैदा होने और मर जाने के लिए है या हमने अपने लिए कोई उच्च नैतिक स्थिति सोची है, धर्म का हम बस किताबी भजन करेंगे या धर्म को स्थापित करबे के लिए हम रन क्षेत्र में भी उतरेंगे अपने धर्म बल और बाहुबल के साथ? आखिर ऐसा कब होगा.. भगवान श्री कृष्ण ने भी अर्जुन को ज्ञान युद्ध के मैदान में ही दिया था नाकि की हस्तिनापुर के सुविधाओ से भरे आमोद्शाला में. दुनिया का हर छोटा बड़ा देश जाग गया पर हम गाँधी के अंधे, बहरे, गूंगे और आलसी बन्दर ही बने हुए हैं. संसार में आसपास सर्वत्र अन्याय, अनर्थ, अत्याचार और कदाचार देखने रहने और हमेशा से किसी अवतार की प्रतीक्षा करने वाले हम का पुरुष अभी भी किसी दुसरे का ही रास्ता देख रहे हैं क्या? हमने कभी भी देश के बारे में विचार नहीं किया, हमने अभी तक देश के लिए सोचा नहीं, हमने अभी तक देश के लिया किया नहीं … पर अब यही सही समय है.. कुछ करने का..वो करने का जो सही है. और जब धर्म-देश रक्षा में शास्त्र संपूर्ण हो जाएँ तो शस्त्र उठाने का समय होता हैI

क्या यह भारतीय इस युग के कौरवो, कलियुग के राक्षको, देश द्रोहियों और आज के देश के दुश्मनों को समय रहते पहचानेगा ..और उनके मान मर्दन के लिए आगे बढ़ेगा?
क्या हमें इसका उत्तर इस युग में मिल पायेगा?

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