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‘दहेज’ से दो परिवार नहीं, पूरा समाज प्रभावित

Sandeep Suman

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यूँ तो इस पेज पर मैं कई सामाजिक मुद्दों पर मुखर रूप से लिखते आया हूँ, किन्तु आज एक ऐसी बुराई और लालच की उस परिघटना बताने जा रहा हूँ जिसने दो कई जिंदगियां तबाह कर दी। ‘दहेज’ की वो सच्ची और जीवंत घटना जिसने ना सिर्फ मेरे और मेरे परिवार का अपितु मोहल्ले के और पड़ोस के कई लोगों को जीना दूभर कर दिया। दरअसल ये घटना आज से 12 वर्ष पूर्व की है मेरे दूर के फूफा-फुआ का हमारे यहाँ आने जाना होता था, वो ‘सूद’ के कारोबार से जुड़े हुए थे और चूंकि के मेरे पिताजी बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के कर्मचारी थे और पिछले दस वर्षों से वेतन का भूखतां नही होता था इसी कारण उन्होंने हमें कुछ पैसे सूद पर दे रखे थे। दिन बीतते गए और मेरे पिताजी के डिपार्टमेंट की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रहा था और आय के साधन कुछ खास नहीं था इसी कारण सूद पे सूद यानि ब्याज बढ़ता चला गया। मेरे पिता एक सीधे साधे सामान्य विचारों वाले थे उनकी शिक्षा उतनी खास ना होने के कारण उन्होंने उनसे पैसे के बदले जमीन की मांग की जिसे पिता ने मान ली, चुकी खेती की जमीन हमारे फूफा जी और हमारा सटा हुआ था इसलिए जमीन पीछे से देने की बात हुई इनसे उनका जमीन के साथ संलग्न हो जाता और उन्हें आने जाने में कोई परेशानी नहीं होती। किन्तु जमीन रजिस्ट्री के वक़्त उन्होंने जमीन अपनी पुत्री के नाम करने की शर्त रख दी वरना 25000 रुपए जो कि हम पर कर्ज था तुरंत मांग रखी मजबूर होकर पिता जी ने सशर्त जमीन लिखी की आगे से रास्ता उन्हें नहीं मिलेगा और यह लिखित रूप से स्टाम्प पेपर पर ले लिया उन्होंने भरोसा दिलाया था कि उनकी पुत्री उनके जमीन होकर ही मुख्य सड़क को जाएगी, भविष्य में विक्रेता पर दवाब नहीं डालेंगे। दरअसल उनकी पुत्री का विवाह जिस लड़के से होना था उसने वह जमीन दहेज के रूप में मांग की थी। जमीन लिखित होने के बाद ही उसने अगले माह विवाह करने को तैयार हुआ।
विवाह और जमीन खरीद के 12 वर्ष बाद वो रास्ते की मांग करने लगे, जबकि रजिस्ट्री कागज पर साफ तौर पर लिखा हुआ था कि ‘आगे से कोई रास्ता नहीं है।’ रास्ते नहीं देने पर वो चौहदी में बसे परिवार के अन्य लोगों पर रास्ता देना का दवाब बनाने लगे जबकि उनके खुद के पिता जी का जमीन उनके बगल में था किंतु घृणित मानसिकता और दहेज के जमीन पर कब्जा जमाने हेतु भूमि मालिक का पति और उनकी सास तरह-तरह के षड्यंत्र रचने लगे, असामाजिक तत्वों तथ्य अन्य का सहारा भी लिया किन्तु जब किसी ने उसके लालच और दहेज कुरीति का विरोध किया तो विवश होकर शांत बैठना पड़ा । उनके पिता जी और भाई उसे रास्ता देना नहीं चाहते क्योंकि वो उनसे वह जमीन कम दाम पर खुद लेना चाहते है, लालच और दहेज प्रकरण के इस खेल में सभी 10 परिवार जो भी उनके पड़ोस के है परेशान है, उनके भाई हमे जान से मारने की धमकी भी देते है जब हमने करवाई की बात की तो उन्होंने हार मान कर सेटलमेंट का केस कोर्ट के दाखिल किया ताकि उन्हें रास्ता मिल सके। अब फैसला न्यायपालिका के अधीन है और हमें न्यायपालिका पे पूर्णता विश्वास है कि वो दहेज और लालच के दानवों को सही सबक सिखाएंगे और न्याय करेगे।
यह एक सच्ची और मेरे निजी जीवन मे दहेज के दंश से घटित सच्ची घटना है, और ना जाने कितने ऐसी दहेज की घटना होगी जिससे ना जाने कितने परिवार और समाज इसके दंश को झेलते होंगे। समाज मे दहेज की बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने के जरूरत है क्योंकि यह सिर्फ किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं अपितु पूरे समाज के लिए घातक है।

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