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कर्ज माफी योजनाओं से ऊपर उठने की जरुरत

Sandeep Suman

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कांग्रेस कर्जमाफी के वायदे के साथ अगले आम चुनाव में उतरने की तैयारी में है, कर्ज माफी से बाजी पलटने की कांग्रेस की ये योजना राजनीतिक दिवालियापन दिखलाती है, क्योंकि अध्ययन और अनुभव ये बताते हाउ जी कर्ज माफी के सिलसिले से न केवल किसानों का, बल्कि बैंको का भी बेरा गर्ग किया है। इस तरह की नीतियां आर्थिक नियमो के विरुद्ध तो है ही साथ ही साथ अर्थव्यवस्था को स्थाई तोड़ पर नुकसान पहुँचाती है। कर्जमाफी योजनाएं अलाभकारी सिद्ध तो हो ही रही है, बल्कि ये किसानों की आदत को भी ख़राब कर रही है। किसानों के बीच यह सन्देश जा रहा है कि कर्ज ले लो और फिर उसे चुकाने की चिंता के वजाय कर्ज माफी की योजनाओं का इंतेजार करो। बात चाहे महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र की हो या देश के अन्य इलाकों की, यह किसी से नहीं छिपा की इस तरह की योजनाओं से किसानों के जीवन में कोई सुधार ला पायी है और ना ही ये योजनाएं उनकी हालात को सुधारने में सामर्थ सिद्ध हुई है। कर्ज माफी का लाभ उठा चुके किसान बार-बार कर्ज की जाल में फंस रहे है और राजनीतिक दल सत्ता सुख प्राप्ति को इस समस्या को दरकिनार करते हुए, कर्ज माफी के प्रलोभन के सहारे बस सियासी सीढिया तलाशने के जुगत में लगे रहने पर उतारू है।
कांग्रेस नेतृत्व वाली सप्रसंग सरकार अपने पहले कार्यकाल में किसान माफ़ी की भारी भरकम योजना के दम पर ही सत्ता में आई थी, उनकी ये योजना उन्हें सत्ता के गलियारों तक तो पहुँचा दी किन्तु किसानों की समस्या जस के तस बनी रही। महारष्ट्र के जिन किसानों के लिए ये योजनाएं लाये गए थे वो फिर कर्ज की जल में फंस गए और चौतरफा राजनीतिक दवाब में पिछले दिनों फडणवीस सरकार को ना चाहते हुए भी किसानों के लिए कर्ज माफी के योजनाओं को लाना पड़ा। कर्ज फाफी जैसे योजनाओं से सबक सिखने के जगह तमाम राजनीतिक पार्टियां सत्ता सुख को प्राप्त करने के लिए कर्ज माफी का जाल किसानों पर फेंकती रहती है और कर्ज की बोझ तले दबे किसान बार-बार इसमें फंस जाते है, बस जाले बदलती है, किसानों की स्थिति जस के तस बनी रह जाती है।
किसानों की समस्या पर गंभीरता से विचार करने और उन्हें बार-बार कर्ज के ताले दबने से रोकने के उपाय करने के वजाय तमाम राजनीतिक दल कर्ज माफी के नाम पर बस छलावा करते आ रहे है। राजनीतिक दलों को कर्ज माफी योजनाओं से दूरी बनानी चाहिए और किसानों के समस्याओं से निपटने के लिए नए मार्ग परास्त करनी चाहिए। वक़्त आ गया है कि चुनाव आयोग और रिज़र्व बैंक कर्ज माफी योजनाओ को वित्तिय अनुशासनहीनता घोषित कर उसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें, क्योंकि कर्ज माफी योजना एक गंभीर समस्या बनते जा रही है जो अर्थव्यवस्था और किसान दोनों के लिए नुकसानदायक है।

संदीप सुमन

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