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मानवीय विकास को कटघरे में खड़ाकर चला गया ‘सूडान’

Sandeep Suman

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प्रारंभिक काल में मनुष्य की भौतिक पर्यावरण की कार्यात्मकता में दो प्रकार की भूमिका हुआ करती थी- ग्राही और दाता की। अर्थात मनुष्य भौतिक पर्यावरण से संशाधनों को प्राप्त करता था पर्यावरणीय संसाधनों में अपना योगदान भी दिया करता था। लेकिन जैसे-जैसे हमारी बुद्धि का विकास हुआ, हम पर्यावरण के प्रति गैर जिम्मेदार होते चले गए। शायद प्रकृति ने सबसे ज्यादा किसीको कुछ दिया है तो वो मनुष्य ही है, जो आज उसी के बलबूते ऊचाइयों को तो प्राप्त हो गया किन्तु व्यवाहरिक रूप से पशुओं से भी निम्न स्तर पर खड़ा हो गया।
 
प्राकृतिक पर्यवारण के साथ हमारी भूमिका जो प्रारंभ में कारक की थी, समय के साथ बदलती चली गई। पर्यावरण करक से पर्यावरण के रूपरांतरकर्ता तथा पर्यावरण परिवर्तन करता से पर्यावरण के विध्वंसकर्ता बन बैठे। इसका हालिया उदहारण है दुनिया के इकलौते सफ़ेद गैंडे ‘सूडान’ का जाना।”
 

ओआई पेजेट (OI Pejata) नैरोबी, में अपना अंतिम सांस लेने वाला दुनिया का एकमात्र सफ़ेद गैंडा ‘सूडान’ अब इस दुनिया को अलविदा कह चुका है, न केवल अलविदा कह चुका है अपितु अपने साथ पीछे कई सवाल छोड़ गया है। क्या ये धरती, ये संसाधन सिर्फ और सिर्फ मनुष्यों का है, क्या मनुष्यों के अलावे इस प्रकृति पर किसी का हक नहीं ? अपनी बुद्धिमानी और विकास के घमंड में चूर मनुष्य, धरती पर अकेले रह पाएगा ? आखिर कब हम अपने ही लिए कब्र खोदना बंद करेगे, कब तक विकास के नाम पर प्रकृति का अन्धाधुन दोहन होते रहेगा ?
मानव-पर्यावरण के मध्य बदलते संबंधों का मूल कारण प्रोधोगिकी ही है इसी ने प्रागैतिहासिक काल से लेकर वर्तमान के औधोगिक कल तक मानव-पर्यावरण के संबंधों में आमूल-चूल परिवर्तन करते आया है। प्राकृतिक पर्यावरण में बाह्य परिवर्तनो को आत्मसात करने की क्षमता होती है किंतु आज हमारा हस्तक्षेप इतना बढ़ गया है कि पर्यावरण में कई समस्याओं का कारण बन बैठा है। जिस कारण जलवायु परिवर्तन का खतरा तो है ही साथ ही साथ कई जीवो के स्पीशीज के खत्म होने का खतरा है, एक मात्र बचे सफ़ेद गैंडे ‘सूडान’ से और दो बचे मादाओं के अंड के साथ मिलान कराकर सफ़ेद गैंडे की स्पीशीज बचाने की कोशिश की गई, किन्तु वो असफल हुई। शायद हम पहले सजग हुवे होते तो उन्हें बचाया जा सकता है। हमारी लालच और अहम् ने धरती पर से कई स्पीशीज को हमेशा के लिए ख़तम कर दिया, अगर हम निकट भविष्य में नहीं चेते और अपने पर्यावरण के प्रति सजग नहीं हुए तो हम कई और जीवो को तो ख़ोएगे ही, साथ ही साथ अपने अस्तित्व को भी खतरे में डाल देंगे।

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