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हथियार के बड़े आयातक से निर्यातक बनने की है दरकार।

Sandeep Suman

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भारत की सेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेना है, और ये सेना हमारे दो पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान की सीमा पर ज्यादा सक्रीय है। एक और चीन की विस्तारवादी नीति से हमें खतरा है तो दूसरी और पाकिस्तान की उस चाल की जो भारत को अस्थिर करने का मौका तलाशता रहता है। इन सबके अलावे देश के अंदर आतंकवाद और उग्रवाद का खतरा अलग बना रहता है। यही कारण है कि हमें एक बड़े सेना की तथा एक बड़े हथियार प्रबंधन की सदा आवश्यकता बनी रहती है। मौजूदा वक़्त में हम हथियारों की आवश्कता को पूरा करने के लिए दुआरे देशों से उसका आयात कर रहे है। दुनिया के प्रतिष्ठित शोध संस्थान स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (सिपरी) के अनुसार भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीददार है। यह आंकड़ा चिंतित करने वाला है, क्योंकि देश के धन का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक कल्याणके जगह हथियार खरीदने में लग रहा है। अब सवाल है कि इसके क्या उपाय हो सकते है ? क्योंकि देश की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए तो आप उसमे कमी बिलकुल नहीं कर सकते। तो एक मात्र रास्ता बचता है कि हम अपने हथियार स्वमं बनाए।
       ”चूँकि हम हथियार बड़े पैमाने पर नहीं बना सकते इसलिए हमें  बाहर  से आयत करना पड़ता है। रॉकेट, सेटेलाइट बनाने वाला देश आखिर हथियार बनाने में इतना पीछे क्यों रह गया ? इसके दो प्रमुख कारण है, पहला भारत प्राचीन काल से ही शांतिप्रिय रहा है हथियारों के प्रति हमें हमेशा अरुचि ही रही है। दूसरा राजनीतिक इक्क्षाशक्ति का अभाव।”

हथियार बनाने के बजाय खरीदने से कई नुकसान होते है। आयत किये गए हथियार हम महँगे कीमत पर खरीदते है, हमारी जरुरत और मज़बूरी होती है तो वे मनमाना कीमत वासुल करते है, और उसे खरीदने के लिए फिर दलाली होती है और भ्रष्टाचार का समावेश होता है। दूसरी और अगर ये हथियार लड़ाई के दौरान ख़राब हो जाए तो इसका रिप्लेसमेन्ट नहीं मिलता और खराब हथियार निर्यातक वापस ले इसकी भी कोई गारंटी नहीं होती। इन सब चीजों से सेना का मनोबल टूटता है। हर पांच साल बाद हथियारों का रेंज प्रभावित हो जाता है, इसलिए उन्हें बदलकर अत्याधुनिक करने की आवश्कता होती है।

                                     हथियार बनाने में हमारी क्षमता काफी कम है और जो हम बनाते भी है, उसके लिए ज्यादातर सामान बाहर से मंगवाना पड़ता है। इसलिए हमें हथियार बनाने के साथ-साथ अब छोटे-छोटे हर चीजों को बनाने की तकनीक विकसित करनी होगी। ताकि हथियार आयत करने से देश पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ को कम किया जा सके और ज्यादा से ज्यादा धन जन कल्याण में लगाया जा सके। समय आ गया है कि सरकार अपनी इक्क्षाशक्ति दिखाये और हथियार निर्माण को प्रोत्साहन दे। क्योंकि हथियार खरीदने के जगह बनाने के कई फायदे है। एक तो वो सस्ते पड़ेगे, दूसरे वे समय पर भी मौजूद होंगे। इससे ना केवल हमारे सेना का मनोबल बढ़ेगा अपितु उन्हें हथियारों के लिए लंबा सफर नहीं कदन पड़ेगा और न ही राजनीतिक लेट लतीफी में पड़ना पड़ेगा, और अगर हम एक समय के उपरांत ज्यादा हथियार बना ले तो हम उसका निर्यात भी कर सकते है।

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