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सिर्फ चेहरे ने बता दिया कैसे ?

Jagran Sakhi

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खूबसूरती नियामत है। कुदरत का दिया हुआ वरदान है। इसका रंग गुलाबी इसलिए है, क्योंकि यह आंखों को सौम्य, नर्म, मुलायम और रेशमी एहसास देता है। सिर्फ चेहरे की खूबसूरती ही सब कुछ नहीं होती। जो सुंदरता पूरे व्यक्तित्व में झलकती है, वही संपूर्ण सौंदर्य है। बाहरी सौंदर्य तभी आकर्षक लगता है जब भीतरी सौंदर्य की चमक उस पर हो। अपने आकर्षक और खूबसूरत व्यक्तित्व के कारण कुछ आम चेहरे भी खास बन जाते हैं। सौंदर्य हर किसी में होता है। किसी का चेहरा, नैन-नक्श अच्छे होते हैं तो किसी की आवाज हमारे मन के तार को छेड देती है। किसी की बातें अच्छी लगती हैं तो किसी की मुसकराहट हजारों गम भुला देती है। अपने आकर्षक व्यक्तित्व और अद्भुत कला के कारण जो आम चेहरे खास बन जाते हैं, सखी उन्हें सलाम कर रही है, इस लेख के जरिये।


रानी मुखर्जी

फिल्म राजा की आएगी बारात में अमजद खान के बेटे शादाब की हीरोइन बन कर रानी बडे परदे पर आई। लेकिन शुरू में उनके गुलथुल शरीर, छोटे कद व आवाज को दर्शकों ने खारिज कर दिया। पर जब वह विक्रम भट्ट की फिल्म गुलाम में आमिर के साथ खंडाला गर्ल बन कर आई तो दर्शकों ने उन्हें दिल में उतार लिया। उसके बाद बंटी बबली, ब्लैक, कुछ-कुछ होता है, कभी खुशी-कभी गम, हम-तुम और नो वन किल्ड जेसिका में अपनी अदायगी के बल पर लोगों के दिलों में जगह बनाई। आज उनका एक खास दर्शक वर्ग बन चुका है।


पी.टी. उषा

केरल की पी.टी. उषा को आज कौन नहीं जानता। उन्होंने आम लडकियों के लिए एथलेटिक्स की राहें खोजीं। उनका चेहरा नहीं उनका काम बोलता है। पावर रफ्तार की मालकिन पी.टी. उषा को उडनपरी के नाम से भी जाना जाता है। 1979 में पी.टी. उषा ने एथलेटिक्स में अपना कदम रखा। 1984 में लॉस एंजलिस ओलंपिक के दौरान 400 मीटर हर्डल रेस में 1 सेकंड के 100वें हिस्से के फर्क के कारण वह रजत पदक जीतने से रह गई थीं।

विनय पाठक


हिंदी सिनेमा में विनय का नाम आज मंजे हुए कलाकारों में शुमार होता है। उन्होंने अलग तरह की फिल्मों में काम किया। खोसला का घोंसला, भेजा फ्राई और रब ने बना दी जोडी में उनकी अलग तरह की भूमिका रही। भारी शरीर और मैच्योर लुक वाले विनय को गाई नेक्स्ट डोर करार दिया जाता है। बिना फाइट, ऐक्शन और रोमैंस के भी उन्हें पसंद करने वाला एक खास वर्ग है। वह खुद कहते हैं कि मैं ग्लैमरस नहीं दिखता, लेकिन अपने अभिनय में सारा ग्लैमर भर देता हूं।


उषा उथुप

पॉप, जैज व प्ले बैक सिंगर उषा की आवाज में वह जादू है, जो थिरकने को मजबूर कर देता है। दम मारो दम के अंग्रेजी वर्जन गाने से चर्चा में आई उषा का करियर यहीं से आसमां पर चढा। 60 के दशक से अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली उषा ने नए दौर में भी वह खनक वह जादू बरकरार रखा है। फिल्म सात खून माफ का गाना डार्लिग आज हर किसी की जुबां पर चढा हुआ है। जिसके लिए उन्हें फिल्म फेयर की तरफ से बेस्ट प्ले सिंगर का अवॉर्ड भी मिला।


नाना पाटेकर

मल्टी फेस माने जाने वाले ऐक्टर नाना पाटेकर ने अपनी पहली फिल्म गमन से साबित कर दिया था कि अभिनय के दम पर दर्शकों के दिलों में जगह बनाई जा सकती है। आम चेहरे वाले नाना पाटेकर ने ताबडतोड उम्दा अभिनय से खास पहचान बना ली। यहां तक कि उनके कुछ डायलॉग लोगों की जुबान पर आज तक बने हुए हैं। वह किरदार को जीते और उसमें डूब जाते हैं। उनकी कुछ फिल्में परिंदा, प्रहार, क्रांतिवीर, अपहरण और राजनीति इस बात की गवाह हैं कि चेहरे से नहीं, व्यक्ति के काम से उसकी पहचान होती है।


कोंकणा सेन

साधारण चेहरे वाली कोंकणा ने बाल कलाकार के रूप में अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा। बॉलीवुड की अंग्रेजी फिल्म मिस्टर एंड मिसेज अय्यर से सुर्खियों में आई और इस फिल्म में उम्दा अभिनय के लिए उन्हें बेस्ट ऐक्ट्रेस का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। उसके बाद फिल्म पेज थ्री, ओंकारा, वेकअप सिड और लाइफ इन अ मेट्रो से उन्होंने काफी सराहना बटोरी। कोंकणा अपने नेक्स्ट डोर गर्ल लुक वाले अंदाज में दर्शकों की खास पसंद बन चुकी हैं। फिल्म अतिथि तुम कब जाओगे में कोंकणा ने मुख्य भूमिका अदा की थी।


ओमपुरी

असाधारण नायक ओमपुरी को एक प्रतिष्ठित अभिनेता माना जा सकता है। अंबाला में जन्मे ओमपुरी ने 1977 में गोधूलि में काम किया। एक अलग िकस्म की आवाज को जल्द ही लोग पहचानने लगे और 1980 में फिल्म आक्रोश में उन्हें पहला ब्रेक मिला। इसके लिए उन्हें 1982 में पहली बार सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार का पुरस्कार भी मिला। उनकी कुछ यादगार फिल्में रहीं-आरोहण, चांद परदेशी, चाइना गेट, सिटी ऑफ जॉय, गांधी, हेरा-फेरी, तमस, माचिस और मंडी आदि।


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