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ग़ज़ल : दर्द जब दिल का दुबाला हो गया

Saarthi Baidyanath

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दर्द जब दिल का दुबाला हो गया
चेहरा-चेहरा इक रिसाला हो गया
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रात भर पढ़ते रहे हम चाँद को
आसमां इक पाठशाला हो गया
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लोरियाँ माँ ने सुनाई और फिर
मेरे सपनों में उजाला हो गया
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जब अना कुचली गई तो ये हुआ
आँख रोई दिल में छाला हो गया
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है मुहब्बत आबे-जमजम की तरह
पी लिया जिसने वो आला हो गया

#saarthibaidyanath

 

 

 

 

नोट : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं।

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