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ग़ज़ल :अलग सबसे तबीअत है करें क्या

Saarthi Baidyanath

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अलग सबसे तबीअत है करें क्या
मुझे बुत से मुहब्बत है करें क्या
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दुआ में मौत मेरी मांगते हैं
सितमगर की शरारत है करें क्या
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मैं आदत शाइरी की छोड़ देता
मगर दिल की ज़रूरत है करें क्या
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कोई भी डुगडुगी सुनकर न आया
मदारी को शिकायत है करें क्या
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सनम ने रख लिया है मुझको दिल में
न मरने की इजाज़त है करें क्या

#saarthibaidyanath

 

 

 

नोट : यह लेखक के निजी विचार हैं और इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी हैं।

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