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ग़ज़ल : ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको

Saarthi Baidyanath

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उठा है दिल में जो तूफां दबा दबा सा है
मगर अभी भी दरीचा खुला खुला सा है
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किसे पुकार रही हैं तेरी खुली ज़ुल्फ़ें
अभी भी होश कहाँ है नशा नशा सा है
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बदन निढाल पड़ा आँख भी लगे बोझिल
चराग़ शब का जला है थका थका सा है
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इधर तबाह हुआ जा रहा है दिल मेरा
उधर भी हुस्न परीशां ज़रा ज़रा सा है
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अभी अभी तो मुहब्बत हुई उसे देखो
अभी अभी से लगे वो जुदा जुदा सा है

#saarthibaidyanath

 

 

 

नोट : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं।

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