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ग़ज़ल : बात कुछ भी नहीं गुलों में है

Saarthi Baidyanath

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बात कुछ भी नहीं गुलों में है
लुत्फ़ जो है वो ख़ुश्बुओं में है
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तुम रिहाई का इंतिज़ार करो
सुख अभी दुख के चंगुलों में है
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फिर गुलाबी है आसमाँ का मिज़ाज
रंग उल्फ़त का बारिशों में है
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मैं तो मंज़िल पे आ गया लेकिन
चाप कदमों की रास्तों में है
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तुझसे मैं दिल की एक बात कहूँ
तू मेरे ख़ास दोस्तों में है

#saarthibaidyanath

 

 

 

नोट : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं।

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