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रोहित सिंह काव्य

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अपने हाथो में तो प्यार की लकीरे भी थी.फिर भी कोई हमे न मिली थी, अभी भी खोज रहा हूँ इधर उधर,कास हमे भी मिल जाये कोई प्यार करने वाला लवर ||

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