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कविता

रोहित सिंह काव्य

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ऐसे ऐसे रास्तो पर खड़ा हुँ ,
किस मोड़ पे मोड़ो इसी दुविधा में पड़ा हुँ,
जिस मोड़ पर भी जाता पीछे कुछ छोड़ जाता हुँ,
आधी दूर चलकर फिर बीच में ही रुक जाता हुँ ,
जो पीछे छूट रहे है मोड़ उसके ही सोच में फिर से पड़ जाता हुँ ||

===रोहित सिंह===

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