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खेल पुरस्कार का सिर्फ नाम बदलना ही काफी नहीं, बुनियादी संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत

rockchandu
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खेलो के सबसे बड़े पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से बदल कर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड करना एक सराहनीय कदम है, जो तीन बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हाकी टीम के सदस्य रहे है।

इससे लोगों की खेल के प्रति जागृति बढ़ेगी और इसपे कोई राजनीती भी नहीं होनी चाहिए। यह एक देर से उठाया हुआ पर एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरुरी है कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान देना।

हमारे देश में अभी भी खेल में बुनियादी संसाधनों की घोर कमी है। खिलाडियों को प्रोपर ट्रेंनिंग में अभी भी बहुत सी बाधाएं है। जिला स्तरों पर खेल अकादमी या स्टेडियम का ना होना या जर्जर हालत में होना, अच्छे कोच का ना होना भी खिलाडियों के प्रदर्शन को काफी प्रभावित करता है। सरकार को चाहिए की देश विदेश से अच्छे और सक्षम कोच को ला कर हमारे खिलाडियों को ट्रेनिंग दी जाए|

खिलाडी अपने भविष्य को ले कर भी काफी असुरक्षित महसूस करते है। समय-समय पर अखबारों में ऐसी खबर आती रहती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी अपने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए रोड पर ठेला लगाते या सब्जी बेचते पाए गए। झारखण्ड की एथलीट गीता कुमार इसका जीता जागता उदाहरण है। सरकार को खिलाडियों की आर्थिक स्वतंत्रता के लिए ठोस कदम उठाने पड़ेंगे।

सरकार की उदासीनता भी कुछ हद तक इसके लिए जिम्मेदार है। ये इस लिए कहा जा सकता है की वित्तिय वर्ष 2020-21 में खेलों के लिए 2596.14 करोड़ रुपये दिए गए, जो की पिछले वर्ष की तुलना में 230.78 करोड़ या 8.16 % कम है और वो भी जब देश के खिलाडी ओलंपिक की तयारी में जुटे थे। अगर चीन की बात करे तो हमसे लगभग 200 गुना ज्यादा स्पोर्ट्स बजट है और इसका परिणाम ओलंपिक पदक तालिका में साफ़ झलकता है।

टोक्यो ओलंपिक 2020 में हम 1 स्वर्ण के साथ कुल 7 पदक जीतकर 48 वे स्थान पे है जबकि हमारा पडोसी देश चीन 38 स्वर्णों के साथ कुल 88 पदक जीतकर पदक तालिका में दुसरे  स्थान पर है और अमेरिका जैसे संपन्न देश से मात्र एक स्वर्ण कम है।

चीन Olympic Games Beijing 2022 की मेजबानी कर रहा है और हम हिजाब, हिन्दू, मुसलमान, गाय, गोबर, अकबर, औरंगजेब, फेकू, पप्पु, अन्दोलनजीवी और पता नहीं क्या क्या में ही उलझे हुए है।

चन्दन कुमार

सहायक प्रधापक

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग

मोतिहारी अभियंत्रण महाविद्यालय, मोतिहारी

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