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देशद्रोही जिन्दा हैं-देश बहुत शर्मिंदा है

AGLI DUNIYA carajeevgupta.blogspot.in

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अभी हाल ही में देश की अलग अलग अदालतों ने जिस तरह से कुछ देशद्रोहियों को जमानत पर रिहा किया है, उसको देखकर देश की जनता के मन में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठने लगा है कि क्या देशद्रोह के मौजूदा कानून को और भी अधिक सख्त बनाए जाने की जरूरत है , ताकि कोई भी देशद्रोही इस तरीके से जमानत पर छूटने पाये क्योंकि जमानत से छूटने के बाद यह लोग देश और समाज के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन जाते हैं और अपने देशद्रोही राजनीतिक आकाओं के इशारे पर इनका नर पिशाची उत्पात 24 घंटे जारी रहता है.


जनता से भारी भरकम टैक्स के रूप में वसूली गयी रकम से सरकारी खर्च पर देशद्रोह की जो पाठशालाएं, देश के अलग अलग हिस्सों में चल रही हैं,उनके अध्यापक और छात्र दोनों ही देशद्रोह में लिप्त हैं.जरूरत इस बात कि है कि इन लोगों को तुरंत ही हिरासत में लेकर इनकी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए. लेकिन अगर देशद्रोह का कानून ही इतना ढीला है कि हर किसी को तुरंत मृत्युदंड के बजाये जमानत मिल रही है तो फिर ऐसे कानून का भला किसे भय होगा ?


देशद्रोह के अपराधियों के लिए कानून को सिर्फ सख्त बनाए जाने की जरूरत है, बल्कि उस में एक निश्चित समय सीमा के अंदर मृत्युदंड का भी प्रावधान होना चाहिए . यह जरूरी है कि देशद्रोह के मामले अधिकतम महीने के अंदर निपटाए जाएँ और इन महीनों तक देशद्रोहियों को जमानत देने की बजाये , उन्हें जेल के अंदर ही रखकर , उनकी नियमित रूप से इतनी मरम्मत की जाए ,ताकि जेल के बाहर बैठे उनके देशद्रोही साथियों और समर्थकों के मन में खौफ पैदा हो और वे लोग भी देशद्रोह की हरकतों से बाज़ आएं.


हाल ही में जमानत पर रिहा किया गया एक देशद्रोही, विपक्षी राजनीतिक दलों में मौजूद अपने देशद्रोही आकाओं की शह पर देशद्रोह कि अन्य पाठशालाओं में जाकर अन्य छात्रों को भी देशद्रोह के लिए प्रेरित कर रहा है और वोट बैंक के लिए भूखी सरकारें पूरी तरह बेबस होकर , देशद्रोह क़ी इन वारदातों के आगे नतमस्तक हुयी जा रही हैं. सरकार इस बात का बहाना बना रही है कि-“पुलिस अगर देशद्रोहियों को पकड़ती है तो अदालत उन्हें जमानत पर रिहा कर देती हैंतो हम क्या करें ?” सरकार अगर देशद्रोहियों के आगे अपने घुटने तक देगी तो देश की क्या हालत होगी,इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है.


आज जरूरत इस बात की है कि देश के दुश्मनों के इशारे पर देशद्रोह की वारदातों में लिप्त सभी देशद्रोहियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाने के लिएअध्यादेशके जरिये एक सख्त कानून लाया जाए. जो भी देशद्रोही, इस तरह के अध्यादेश के विरोध में खड़ा दिखाई दे, उसे भी हिरासत में लेकर, उसकी इस कानून के तहत पहले मरम्मत और फिर मृत्युदंड क़ी उचित व्यवस्था की जाए. कुछ मीडिया हाउस देश क़ी आज़ादी के बाद से ही देश के दुश्मनों के इशारे पर चल रहे हैं और उनका एक मात्र उद्देश्य देशद्रोहियों को महिमामंडित करके ,उन्हें ख़बरों में बनाए रखना होता है.-इन मीडिया घरानों क़ी पहचान करके उनके मालिकों और सम्पादकों को भी देशद्रोह के कानून में लपेटना सरकार क़ी जिम्मेदारी है. जब तक देशद्रोहियों के खिलाफ सरकार इस तरह से ठोस कार्यवाही से परहेज़ करती रहेगी,भारत माता क़ी यही आवाज़ गूंजती रहेगी-” देशद्रोही जिन्दा हैंदेश बहुत शर्मिंदा है“.

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