Menu
blogid : 19157 postid : 1325934

इस मंदिर में जलती मां की ज्योत को बुझाने में नाकाम रहा था सम्राट अकबर, दान में चढ़ाया था सोना

मां ज्वाला शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में एक प्रमुख शक्तिपीठ है. कहते हैं कि यहां पर माता सती की जीभ गिरि थी. यहां की देवी मां अंबिका और अनमाता भैरव के रूप में भगवान शिव हैं. इस मंदिर में ज्वाला रूप में माता का पूजन किया जाता है. यह मंदिर माता के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है, क्योंकि यहां पर किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं की पूजा होती है.


cover maa


देवी के नाम पर रखे गए हैं नौ ज्वालाओं के नाम

यहां की नौ ज्वालाओं के नाम देवी के नाम पर रखे गए हैं. इनके नाम इस प्रकार है महाकाली, मां अन्नपूर्णा, मां चंडी, मां हिंगलाज, विन्ध्यवासिनी, महालक्ष्मी, महा सरस्वती, मां अम्बिका और अंजना देवी. ज्वाला मंदिर का एक रहस्य भी है. इस मंदिर में लगातार किसी भी ईंधन, तेल या घी की सहायता के बिना एक चट्टान से निकलती ये ज्वालाएं देखी जा सकती है.


JwalaJiDev


माता को चढ़ावे में चढ़ता है नारियल

51 शक्तिपीठों में एक प्रमुख शक्तिपीठ मां ज्वाला को माना जाता है. शक्तिपीठ उस स्थान को कहते हैं, जहां पर भगवान विष्णु के चक्र से कटकर माता सती के अंग गिरे थे. माना जाता है कि जो भी भक्त यहां पर माता को नारियल चढ़ाता है उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है.


kangra


धरती से नौ अलग-अलग जगहों से ज्वाला निकलती है

इस मंदिर को राजा भूमि चंद ने बनवाना शुरू किया था. उसके बाद इसे महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने पूर्ण रूप से बनवाया था. यहां पर धरती से नौ अलग-अलग जगहों से ज्वाला निकलती है जिसके उपर ही मंदिर का निर्माण करवाया गया है.


JwalamukhiMata

सम्राट अकबर ने सोने का छत्र चढ़ाया

यहां पर मान्यताएं है कि सम्राट अकबर ने अपने समय में यहां पर जल रही ज्योत को बुझाने के प्रयास किए थे, लेकिन हर बार वह असफल रहा. यहां पर कहानियां है कि अकबर ने देवी के चमत्कारों की परीक्षा के लिए उनके एक भक्त का सिर कलम कर दिया था. भक्त ध्यानू का सिर कटते ही ज्वाला और तेज हो गई और ध्यानू का सिर खुद ही जुड़ गया औऱ वो जीवित हो उठा. अंत में उसे भी मां की शक्ति का आभास हुआ और उसने यहां सोने का छत्र चढ़ाया.


jwala-devi-temple


ज्वाला देवी शक्तिपीठ में माता की ज्वाला के अलावा एक अन्य चमत्कार भी देखने को मिलता है ‘गोरख डिब्बी’ का रहस्य. माता ज्वाला देवी के मंदिर के पास ही ‘गोरख डिब्बी’ नामक स्थान है, यहां एक कुण्ड में पानी खौलता हुआ प्रतीत होता, जबकि छूने पर कुंड का पानी ठंडा लगता है..Next


Read More:

मंदिर में इस कारण से बजाई जाती है घंटी, आपको अंदाजा भी नहीं होगा

जानें मंदिर और मस्जिद के गुंबद का क्या है रहस्य

इस मंदिर में की जाती है महाभारत के खलनायक समझे जाने वाले दुर्योधन की पूजा

मंदिर में इस कारण से बजाई जाती है घंटी, आपको अंदाजा भी नहीं होगा
जानें मंदिर और मस्जिद के गुंबद का क्या है रहस्य
इस मंदिर में की जाती है महाभारत के खलनायक समझे जाने वाले दुर्योधन की पूजा

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *