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ये है महिला नागा साधुओं की रहस्यमय दुनिया, हैरान कर देगी इनसे जुड़ी 10 बातें

आपने नागा साधुओं की रहस्यमय दुनिया के बारे में तो जरूर सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि महिला नागा साधुओं की दुनिया भी कम रोचकता से भरी हुई नहीं है. बल्कि ये कहना गलत नहीं होगा कि हम में से अधिकतर लोगों को ये बात पता ही नहीं है कि महिला नागा साधुओं का भी अस्तित्व है. आइए हम आपको बताते हैं महिला नागा साधुओं से जुड़ी हुई रोचक बातें.


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1. सन्यासिन बनने से पहले महिला को 6 से 12 साल तक कठिन ब्रह्मचर्य  का पालन करना होता है. इसके बाद गुरु यदि इस बात से संतुष्ट हो जाते हैंं कि महिला ब्रह्मचर्य का पालन कर सकती है तो उसे दीक्षा देते हैंं.

2. महिला नागा सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के साधु-संत महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की जांच-पड़ताल करते हैंं.

3. महिला को भी नागा सन्यासिन बनने से पहले स्वंयंं का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है.

4. जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है, उसके आचार्य महामंडलेश्वर ही उसे दीक्षा देते हैंं.

5. महिला को नागा सन्यासिन बनाने से पहले उसका मुंडन किया जाता है और नदी में स्नान करवाते हैंं.


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6. महिला नागा सन्यासिन पूरा दिन भगवान का जप करती है. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना होता है. इसके बाद नित्य कर्मो के बाद शिवजी का जप करती हैंं, दोपहर में भोजन करती हैंं और फिर से शिवजी का जप करती हैंं. शाम को दत्तात्रेय भगवान की पूजा करती हैंं और इसके बाद शयन.

7. सिंहस्थ और कुम्भ में नागा साधुओं के साथ ही महिला सन्यासिन भी शाही स्नान करती हैंं. अखाड़े में सन्यासिन को भी पूरा सम्मान दिया जाता है.

8. जब महिला नागा सन्यासिन बन जाती हैंं तो अखाड़े के सभी साधु-संत इन्हे माता कहकर सम्बोधित करते हैंं.


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9. सन्यासिन बनने से पहले महिला को ये साबित करना होता है कि उसका परिवार और समाज से कोई मोह नहीं है. वह सिर्फ भगवान की भक्ति करना चाहती है. इस बात की संतुष्टि होने के बाद ही दीक्षा देते हैंं.

10. पुरुष नागा साधु और महिला नागा साधु में फर्क केवल इतना ही है की महिला नागा साधु को एक पीला वस्त्र लपेटकर रखना पड़ता है और यही वस्त्र पहनकर स्नान करना पड़ता है. नग्न स्नान की अनुमति नहीं है, यहां तक की कुम्भ मेले में भी नहीं…Next


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