Menu
blogid : 19157 postid : 1388002

नवरात्रि 2018: देवी मंदिर जहां आज भी आते हैं आल्हा

Shilpi Singh

10 Oct, 2018

आज से नवरात्र शुरू हो चुके हैं और पूरे देश में मां की पूजा की जा रही है। वैसे तो मां के कई  मंदिर हैं पूरे देश में जो मशहूर हैं लेकिन मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर देवी का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। यहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मां के इस मंदिर को शारदा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। देशभर में देवी शारदा का यह एक मात्र मंदिर है। यहां मां दुर्गा देवी सरस्वती के रूप में दर्शन देती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं इस मंदिर के बारे में कुछ खास बातें।

 

 

देवी शारदा के साथ इनकी भी होती है पूजा

देवी का यह विशेष मंदिर त्रिकुट पर्वत की चोटी पर मध्य भाग में स्थित है जहां देवी शारदा के अतिरिक्त देवी काली, दुर्गा मां, गौरी शंकर, फूलमति माता, काल भैरवी, शेषनाग, जलपा देवी व ब्रह्म देव की भी पूजा होती है।

 

 

योद्धा आल्हा का विशेष स्थान

मैहर देवी मंदिर के पीछे यहां आल्हा का तालाब भी है। वह एक योद्घा थे। मंदिर से 2 किमी आगे एक आखाड़ा है। माना जाता है कि यहां आल्हा अपने भाई उदल के साथ कुश्ती किया करते थे।  मैहर देवी को शारदा माई कहे जाने के पीछे भी एक रहस्य है। मान्यता है कि वीर आल्हा देवी को शारदा माई के नाम से पुकारता था। तभी से मैहर देवी को शारदा माई व शारदा देवी के नाम से जाना जाता है।

 

 

ऐसे हुई मंदिर की खोज

स्थानीय लोगों के अनुसार योद्धा आल्हा और उदल ने राजा पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्घ किया था। इसी दौरान उन्होंने मंदिर की खोज की थी। मान्यता है कि आल्हा ने मंदिर में 12 साल तक तप किया। जिससे मां ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था। मान्यता है कि आल्हा और उदल दोनों 900 साल से आज भी जीवित है। कई लोगों का मानना है कि आज भी ये योद्घा मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही मां के दर्शन कर लेते हैं। पट खुलने पर मंदिर के फर्श पर जल व देवी पर फूल अर्पित हुए दिखते है।

 

 

मंदिर का इतिहास

मान्यता है कि राजा दक्ष की पुत्री सती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी, लेकिन उनके पिता को यह मंजूर नहीं था। पिता की इच्छा के विपरीत सती ने भगवान शिव के साथ विवाह किया। तभी एक दिन राजा दक्ष ने महल में एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। सती की मृत्यु से महादेव बहुत क्रोधित हुए, उन्होंने अपने त्रिनेत्र खोल दिए। साथ ही यज्ञ कुंड से देवी सती का शव उठाकर वहां तांडव करने लगे। इससे पूरे ब्रह्मांड में हलचल मच गई।

 

 

देवी सती के अंगों से बने शक्तिपीठ

सृष्टि की शांति के लिए भगवान विष्णु ने अपने चक्र से देवी सती के शव के 52 भाग विभाजित कर दिए। देवी के शरीर का जो भाग जिस स्थान पर गिरा वहां शक्तिपीठ बन गए। मैहर देवी में देवी सती का हार गिरा था। जिस कारण इसे मां हार यानी मैहर देवी नाम दिया गया। मैहर देवी के दर्शन के लिए भक्तों को पर्वत पर बनें 1063 सीढ़ियों को पार करना होता है।…Next

 

Read more:

नागपंचमी विशेष : इस वजह से मनाई जाती है नागपंचमी, ऐसे हुई थी नागों की उत्पत्ति

कामेश्वर धाम जहां शिव के तीसरे नेत्र से भस्म हो गए थे कामदेव

भगवान शिव को क्यों चढ़ाया जाता है दूध, शिवपुराण में लिखी है ये कहानी

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *