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मरते वक्त दुर्योधन ने युद्ध हारने के 3 कारण बताए, श्रीकृष्ण ने ऐसे दूर की दुविधा

Rizwan Noor Khan

3 May, 2020

महाभारत युद्ध को ब्रह्मांड का सबसे बड़ा विश्‍वयुद्ध बताया जाता है। इसे संसार का पहला महायुद्ध होने की संज्ञा भी दी जाती है। हजारों महाबलशाली और महारथी योद्धाओं और शक्तिशाली सेना के बावजूद कौरव इस युद्ध को पांडवों के हाथों हार गए थे। दुर्योधन ने अपनी हार के 3 सबसे बड़े कारण बताए थे।

 

 

 

 

युद्ध में शामिल नहीं हुए महाबली बलराम
महाभारत का युद्ध अधिकार, सम्‍मान, प्रतिशोध और सत्‍य की स्‍थापना के किया गया था। कौरव और पांडवों के बीच लगातार 18 दिन चले इस युद्ध में आर्यावर्त के समस्‍त योद्धाओं ने भाग लिया था। एक ही परिवार के भाईयों के बीच छिड़े इस युद्ध में श्रीकृष्‍ण के भाई और दुर्योधन के गुरु महाबलशाली बलराम ने पारिवारिक लड़ाई बताकर इसमें भाग नहीं लिया था।

 

 

 

 

50 लाख सैनिक आ गए आमने-सामने
महाभारत युद्ध में दोनों ओर की सेनाओं के सैनिकों की संख्‍या 50 लाख से भी ज्‍यादा थी। युद्ध का पहला दिन पांडवों के लिए निराशाजनक रहा। क्‍योंकि, पितामह भीष्‍म और राजा शल्‍य ने पांडव सेना के वीर योद्ध विराट नरेश के पुत्र उत्‍तर और श्वेत का वध कर दिया था। दूसरे दिन के युद्ध में अर्जुन ने श्रीकृष्‍ण के समझाने पर पितामह के खिलाफ धनुष उठा लिया था।

 

 

 

 

पहले दिन विराट नरेश ने खोए अपने पुत्र
इस युद्ध में हर दिन दोनों ओर के कई सौ सैनिक और योद्धा मौत के घाट उतर जाते थे। महाबलशाली योद्धाओं के बावजूद युद्ध के 18वें दिन कौरवों के युवराज दुर्योधन को गदाधारी भीम ने मौत के करीब पहुंचा दिया तो उसने अपनी हार स्‍वीकार कर ली। दुर्योधन ने मरते अपनी हार की 3 प्रमुख वजह बताईं। उसे सुनने के लिए पांडवों की ओर से श्रीकृष्‍ण भी पहुंचे।

 

 

 

 

 

दुर्योधन ने बताया उसकी हार क्‍यों हुई
दुर्योधन ने कहा कि उसने स्वयं नारायण के स्थान पर उनकी सेना लेकर पहली गलती की। अपनी माता के समझाने के बावजूद वह उनके सामने पत्तों से बना लंगोट पहनकर पहुंचना उसकी दूसरी गलती थी। तीसरी वजह उसने खुद को अंत में युद्ध क्षेत्र में उतरने को माना। दुर्योधन ने कहा कि अगर वह पहले दिन युद्ध के उतर जाता तो वास्‍तविकता पता चलती और उसके भाई, मित्र और सैनिकों की मौत नहीं होती।

 

 

 

 

श्रीकृष्‍ण ने मर रहे दुर्योधन की आंखें खोलीं
दुर्योधन की बात खत्‍म होने पर श्रीकृष्‍ण ने बताया कि हार का मुख्य कारण तुम्हारा अधर्मी व्यवहार और अपनी ही कुलवधू का चीरहरण करवाना था। तुमने स्वयं अपने कर्मों से अपना भाग्य लिखा। यह सुनकर दुर्योधन को अपनी असली गलती का अहसास हो गया। बता दें कि महाभारत युद्ध में कौरवों की हार के कई और कारण भी हैं, जिसमें श्रीकृष्‍ण का पांडवों की तरफ से लड़ना प्रमुख माना जाता है।…Next

 

 

 

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