Menu
blogid : 19157 postid : 1388753

महाभारत युद्ध में इस राजा ने किया था खाने का प्रबंध, सैनिकों के साथ बिना शस्‍त्र लड़ा युद्ध

Rizwan Noor Khan

2 Dec, 2019

कौरव और पांडवों के बीच हक और सत्‍य के लिए लड़े गए महाभारत युद्ध से पूरा ब्रह्मांड हिल गया था। कहा जाता है कि यह संसार का पहला विश्‍वयुद्ध भी था। क्‍योंकि इसमें पूरे आर्यावर्त के राजाओं ने हिस्‍सा लिया था। युद्ध के दौरान मैदान पर मौजूद दोनों सेनाओं के करीब 50 लाख सैनिकों के खाने का इंतजाम बड़ी चुनौती थी। इस समस्‍या को दक्षिण के एक राजा ने हल कर दिया था।

 

 

 

 

 

ब्रह्मांड का पहला विश्‍वयुद्ध
भारत के दक्षिण में प्रचलित कथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध की शुरुआत से पहले आर्यावर्त के समस्‍त राजा इसमें भाग लेने के लिए हस्तिनापुर पहुंच रहे थे। कौरव और पांडव इन राजाओं को अपना प्रयोजन और लक्ष्‍य बताकर उन्‍हें अपनी ओर करने का प्रयास करने में जुटे थे। तब दक्षिण के उडुपी नरेश अपनी विशाल सेना के साथ धर्म और सत्‍य की स्‍थापना के लिए लड़े जा रहे इस युद्ध में भाग लेने के लिए हस्तिनापुर पहुंचे।

 

 

Image result for Mahabharat Yudha

 

 

 

उडुपी नरेश ने श्रीकृष्‍ण को दिया प्रस्‍ताव
कौरव और पांडव के प्रतिनिधि प्रतापी उडुपी नरेश को अपनी अपनी ओर से युद्ध लड़ने के लिए मनाने लगे। दोनों पक्षों की बातें सुनकर उडुपी नरेश तय नहीं कर पाए कि वह किसकी ओर से युद्ध लड़ें और उन्‍हें वहां मौजूद आर्यावर्त की समस्‍त सेना के भोजन की चिंता सताने लगी। उडुपी नरेश पांडवों के शिविर में पहुंचे और श्रीकृष्‍ण से मिले। उडुपी नरेश ने श्रीकृष्‍ण से कहा कि भाईयों के बीच हो रहे इस युद्ध के वह समर्थक नहीं हैं। लेकिन अब इसे टाला नहीं जा सकता है, लिहाजा वह इसमें वह शस्‍त्रों के जरिए भाग नहीं लेना चाहते हैं। लेकिन, वह इस महायुद्ध में शामिल जरूर होना चाहते हैं।

 

 

 

 

 

50 लाख से ज्‍यादा सैनिकों के लिए भोजन
श्रीकृष्‍ण उडुपी नरेश का प्रयोजन समझ गए और उनसे पूछा कि आप क्‍या चाहते हैं। इस पर उडुपी नरेश ने दोनों ओर के सैनिकों के भोजन का प्रबंध करने का प्रस्‍ताव रखा। इस पर श्रीकृष्‍ण मान गए और उडुपी नरेश ने अपनी सेना के साथ बिना शस्‍त्रों के युद्ध में भाग लिया। उडुपी नरेश ने दोनों ओर के सैनिकों के लिए 18 दिन तक रोजाना भोजन उपलब्‍ध कराया। युधिष्ठिर ने राजतिलक समारोह के दौरान उडुपी नरेश की प्रशंसा करते हुए उन्‍हें बिना शस्‍त्र के युद्ध लड़ने वाले राजा के नाम से सुशोभित किया।…Next

 

 

Read More:

श्रीकृष्‍ण की मौत के बाद उनकी 16000 रानियों का क्‍या हुआ, जानिए किसने किया कृष्‍ण का अंतिम संस्‍कार

काशी के कोतवाल काल भैरव के सामने यमराज की भी नहीं चलती, कांपते हैं असुर और देवता

अल्‍प मृत्‍यु से बचने के लिए बहन से लगवाएं तिलक, यमराज से जुड़ी है ये खास परंपरा और 4 नियम

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *