Menu
blogid : 19157 postid : 1387937

आखिर क्यों मनाया जाता है दही-हांडी का उत्सव, क्या है इसका महत्व

जन्माष्टमी का त्यौहार आ गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई दिनों से इस त्यौहार के लिए तैयारियां चल रही हैं। मथुरा-वृंदावन में रासलीलाओं ने लोगों को मन मोह रखा है, तो दूसरी जगहों पर भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी झांकियां तैयार की गई है। किन सबसे ज्यादा इस त्यौहार पर उमंग दही हांडी की रहती है। पूरे महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में जन्माष्टमी के दिन दही-हांडी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि जन्माष्टमी और दही-हांडी में आख़िर क्या रिश्ता है? क्यों इस दिन महाराष्ट्र के कोने-कोने में लगभर हर इलाके में इसकी प्रतियोगिता की जाती है जिसमें सैंकड़ों लोग शामिल होते हैं? हम आपको इसी की रोचक जानकारी दे रहे हैं।

Shilpi Singh
Shilpi Singh 2 Sep, 2018

 

 

कृष्ण कहलाते हैं माखन चोर

अपने बचपन में श्रीकृष्ण बेहद ही नटखट थे, पूरे गांव में उन्हें उनकी शरारतों के लिए जाना जाता था। श्रीकृष्ण को माखन, दही और दूध काफी पंसद था, उन्हें माखन इतना पंसद था जिसकी वजह से पूरे गांव का माखन चोरी करके खा जाते थे। इतना ही उन्हें माखन चोरी करने से रोकने के लिए एक दिन उनकी मां यशोदा को उन्हें एक खंभे से बांधना पड़ा और इसी वजह से भगवान श्रीकृष्ण का नाम ‘माखन चोर’ पड़ा। वृन्दावन में महिलाओं ने मथे हुए माखन की मटकी को ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया जिससे की श्रीकृष्ण का हाथ वहां तक न पहुंच सके। लेकिन नटखट कृष्ण की समझदारी के आगे उनकी यह योजना भी व्यर्थ साबित हुई। माखन चुराने के लिए श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक पिरामिड बनाते और ऊंचाई पर लटकाई मटकी से दही और माखन को चुरा लेते थे। वहीं से प्रेरित होकर दही हांडी का चलन शुरू हुआ।

 

 

दही-हांडी से करते हैं कृष्ण को याद
हम सभी ने पौराणिक कथाओं में सुना है कि बाल कृष्ण दही की हांडी से दही और मक्खन चुराकर खाते थे। इसी वजह से उनके जन्मदिन पर ये परंपरा चल पड़ी कि दही-हांडी का खेल खेला जाने लगा। ऐसा करके लोग भगवान कृष्ण को याद करते हैं। ये खेल उनके जन्मदिन का उत्सव मनाने का एक तरीका है।

 

 

गोविंदाओं पर पानी फेंकने की परंपरा
पौराणिक कथाओं में आपने ये भी सुना होगा कि जब-जब भगवान कृष्ण गोकुल के घरों की मटकियां फोड़ते थे, वो लोग परेशान हो जाते थे। उन्हें रोकने की कोशिश की जाती थी। इसी को याद करते हुए दही-हांडी प्रतियोगिताओं में जब गोविंदा हांडी फोड़ने की कोशिश करते हैं तो गोकुलवासियों की तरह ही लोग उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, जिसके लिए वो उनपर पानी फेंकते हैं।

 

 

क्या है दही-हांडी आयोजन

गुजरात और द्वारका में माखन हांडी की प्रथा काफी प्रसिद्ध है, जहां मटकी को दही, घी, बादाम और सूखे मेवे से भरकर लटकाया जाता है। लड़के ऊपर लटकी मटकी को फोड़ते हैं और अन्य लोग लोकगीतों और भजनों पर नाचते-गाते हैं। तमिलनाडु में दही हांडी को ‘उरीदी’ के नाम से जाना जाता है। दही हांडी महाराष्ट्र में होने वाली गोकुलाष्टमी का अहम हिस्सा है, जिसे काफी बड़े स्तर पर मनाया जाता है।…Next

 

Read more:

नागपंचमी विशेष : इस वजह से मनाई जाती है नागपंचमी, ऐसे हुई थी नागों की उत्पत्ति

कामेश्वर धाम जहां शिव के तीसरे नेत्र से भस्म हो गए थे कामदेव

भगवान शिव को क्यों चढ़ाया जाता है दूध, शिवपुराण में लिखी है ये कहानी

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *