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जम्मू-कश्मीर की ये 5 धार्मिक जगह हैं आस्था का केंद्र, जानें क्या खास है यहां

Pratima Jaiswal

7 Aug, 2019

जम्मू-कश्मीर पर हुए ऐतिहासिक फैसले के बाद से लोगों के बीच खुशी की लहर देखी जा रही है। ऐसे में राजनीति पहलुओं के अलावा इस फैसले को धार्मिक महत्व से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जिनका हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है। आइए, जानते हैं जम्मू-कश्मीर की कौन-सी जगहें हैं आस्था का केंद्र-

 

अमरनाथ
शिव भक्तों के लिए हिमालय की गोद में स्थित अमरनाथ धाम सर्वाधिक आस्था वाला सबसे पवित्र तीर्थस्थल है। हर साल यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और प्राकृतिक रूप से बर्फ से बने हिमलिंग के दर्शन करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार इस गुफा में भगवान शिव औऱ देवी पार्वती का निवास है। इसी गुफा में शिवजी ने देवी पार्वती को अमर होने का रहस्य बताया था।

 

महामाया शक्तिपीठ

 

51 शक्तिपीठों में से महामाया शक्तिपीठ अमरनाथ गुफा में स्थित है, यहां देवी सती का कंठ गिरा था। यहां भगवान शिव के अलावा दो और हिमलिंग बनते हैं। जो एक माता पार्वती का है और दूसरा गणेशजी। यहां माता भगवती की पूरे विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। यहां भगवती के अंग और उनके आभूषणों की पूजा की जाती है। महामाया शक्तिपीठ के साथ ही इस पवित्र गुफा में बाबा भैरों की पूजा त्रिसंध्येकश्वहर भगवान के रूप में होती है।

 

पिस्सू टॉप

 

 

देवताओं व असुरों के बीच हुआ था संग्रामअमरनाथ गुफा की यात्रा मार्ग में आने वाला स्थान धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व रखता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर देवासुर संग्राम हुआ था। यहां पर देवताओं ने असुरों को पिस्सूओं की तरह मसल कर रख दिया था। कुछ कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव ने अमरनाथ जाते हुए यहां पर अपने शरीर से पिस्सुओं को उतार कर रख दिया था। हिंदू धर्म में इस स्थान को काफी पवित्र माना जाता है।

 

देवी त्रिकूटा

 

हिन्दुओं के पवित्र स्थलों में से एक है माता वैष्णो देवी का भवन, जो कश्मीर के त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। वैष्णो देवी को माता रानी, त्रिकूटा और वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है। यहां लाखों भक्त माता का आशीर्वाद पाने के लिए हर साल यहां आते हैं। महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली यहां पिंडी रूप में विराजमान हैं। रामायण की कथा के अनुसार देवी त्रिकूटा ने भगवान राम से विवाह की इच्छा जताई। रामावतार में एक पत्नी व्रत लेने के कारण भगवान राम ने देवी त्रिकूटा को वचन दिया कि वह कलियुग के अंत में कल्कि अवतार लेकर त्रिकूटा से विवाह करेंगे।

 

खीर भवानी

 

 

 

खीर भवानी को कश्मीर की देवी भी कहा जाता है। इस मंदिर में मां खीर भवानी को केवल खीर का ही भोग लगता है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि रावण खीर भवानी देवी का परम भक्ता था। देवी भी उसके जप और तप से प्रसन्ना रहती थीं लेकिन जब रावण ने सीता का हरण कर लिया, तो दुखी होकर देवी हनुमानजी के साथ लंका से कश्मीणर आ गईं।…Next

 

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