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‘जिसे खुद पर भरोसा वही विजेता’ गुरु नानक देव के 10 उपदेश जो आपको डिप्रेशन से बाहर निकाल देंगे

Rizwan Noor Khan

12 Nov, 2019

 

सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव का जन्‍मदिन प्रकाश पर्व के रूप में पूरे भारत वर्ष में कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। गुरु नानक देव ने अपने जीवन का ज्‍यादातर समय यात्राओं में व्‍यतीत किया। भ्रमण के दौरान उन्‍होंने सामाजिक कुरीतियों का विरोध करते हुए उन्‍हें सुधारने के पक्ष में उपाय बताए। पाकिस्‍तान के तलवंडी में जन्‍में गुरु नानक देव जी ने लोगों को सही दिशा दिखाने और उनके जीवन को सार्थक बनाने के लिए 10 उपदेश दिए। इन उपदेशों का आज भी लोग पालन करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन 10 उपदेशों में संसार का सार छिपा हुआ है और जो भी इन उपदेशों का पालन करता है उसे सभी दुखों और चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है।

 

 

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दुनिया भर के लोगों का जीवन बदला
सिख धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार गुरु नानक देव का जन्‍म पिता कल्‍यााण उर्फ मेहता कालू और मां तृप्‍ती देवी के घर हुआ था। ऐसा माना जाता है कि जन्‍म से ही गुरु नानक देव अलौकिक शक्तिओं के मालिक थे। 16 वर्ष की आयु में विवाह होने पर नानक देव पर पारिवारिक जिम्‍मेदारियां बढ़ गईं। इस बीच वह पुत्र श्रीचंद और लख्‍मी के पिता बने। पारिवारिक मोह माया से बाहर निकलकर लोगों को जीवन का सही मकसद देने और जानने के इरादे से यात्रा शुरू कर दी।

 

 

 

 

सिख धर्म की स्‍थापना
1469 में कातर्कि पूर्णिमा के दिन जन्‍मे गुरु नानक देव ने विवाह उपरांत 1521 तक लगातार यात्राएं कीं। इन यात्राओं के दौरान वह अफगानिस्‍तान, इराक, मिस्र और अरब समेत दर्जनों देशों में पहुंचे और लोगों को जीवन का सही मतलब समझाया। नानक देव की इन यात्राओं का जिक्र सिख धर्म के ग्रंथों में ‘उदासियां’ के रूप में मिलता है। गुरु नानक देव ने पूरी दुनिया में अपने उपदेशों के जरिए ख्‍याति हासिल की। उनके अनुयायियों की संख्‍या दिन पर दिन बढ़ती गई। इस दौरान गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्‍थापना भी की।

 

 

 

 

गुरु नानक के 10 उपदेश

1. सदैव एक ईश्वर की उपसाना करो।

2. ईश्वर एक है।

3. जिसे अपने आप पर विश्वास नहीं है, वह कभी भी भगवान में विश्वास नहीं कर सकता है।

4. केवल वही बोलो, जो आपको सम्मान दिलाए।

5. मृत्यु को बुरा नहीं कहा जाएगा, अगर कोई जानता है कि वास्तव में कैसे मरना है।

6. यह दुनिया सपने में रचे हुए एक रंगमंच के समान है।

7. दुनिया में कोई भी व्यक्ति इस भ्रम में न रहे कि बिना गुरु के ज्ञान के भवसागर को पार किया जा सकता है।

8. ना मैं बच्चा हूं, ना एक युवक हूं, ना पौराणिक हूं और ना ही किसी जाति से हूं।

9. यह दुनिया कठिनाइयों से भरी है, जिसे खुद पर भरोसा है, वही विजेता कहलाता है।

10. जिन्होंने प्रेम किया है, उन्होंने ईश्वर को पाया है।…Next

 

 

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