Menu
blogid : 19157 postid : 866987

यहां कोर्ट नहीं रामभक्त हनुमान करते हैं विवादों का निपटारा

कहते हैं जो बाते खुद समझ न आएं उनका फैसला ईश्वर पर छोड़़ देना चाहिए. बहुत हद तक ये बात सही भी है, क्योंकि हमारे हाथ में तो मात्र कर्म है उसे दिशा और परिणति देना तो ईश्वर के ही हाथ में है, लेकिन फिर भी जब भी समाज में कोई दुर्घटना या हादसा होता है तो हम उस केस के लिए कोर्ट-कचहरी जाते हैं ताकि हमें इंसाफ मिल सके. वहां न्याय के लिए जज महोदय को सबूतों की जरूरत पड़ती है पर क्या आप विश्वास करेंगे कि हमारे ही देश में छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर में ज्यादातर झगड़ों या विवादों के निपटारे के लिए लोग भगवान हनुमान के मंदिर में जाते हैं. यहां विवादों के निपटारे के लिए फैसले लिए जाते है और साथ ही धार्मिक अनुष्ठान भी होते हैं.


Lord-Hanuman


दरअसल बिलासपुर में कहने को तो उच्च न्यायालय है, पर शहर के मगरपारा में बजरंगी पंचायत मंदिर है, जहां गत 80 सालों से छोटे-बड़े विवादों पर फैसला लिए जाने की न्यारी परंपरा चलती आ रही है. आम- आदमी के जीवन से जुड़े सभी फैसलों का निपटारा भगवान हनुमान जी करते हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि क्या साक्षात हनुमान जी यहां प्रकट होते है? तो ऐसा नहीं है, पर हां! उनकी प्रतिमा जरूर छोटे से चबूतरे पर लगाई गई है, जहां पिछले 80 सालों से चौपाल लगती है और आम-जीवन की समस्याओं पर फैसले भगवान हनुमान को साक्षी मानकर लिए जाते हैं और सभी इसे बजरंग बली का फैसला मानकर बिना उंगली उठाएं स्वीकर कर लेते हैं. इतना ही नहीं आज भी ये परंपरा ज्यों की त्यों कायम है.


Read:स्त्रियों से दूर रहने वाले हनुमान को इस मंदिर में स्त्री रूप में पूजा जाता है, जानिए कहां है यह मंदिर और क्या है इसका रहस्य


बजरंगी पंचायत के मुखिया गणेश पटेल ने बताया कि आज भी लोग अपनी छोटी – बड़ी समस्याओं के निदान के लिए मंदिर में इकट्ठे होते हैं और फिर उन समस्याओं की सुनवाई होती है और भगवान हनुमान की अनुकम्पा से फैसले ले लिए जाते हैं, जिन्हें सभी जन सहमति से स्वीकार कर लेते हैं.


Hanuman 1


यहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि लगभग 80 साल पहले सुखरु नाई ने भगवान हनुमान जी की प्रतिमा पीपल के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर स्थापित की थी. फिर वक्त के साथ-साथ हनुमान भक्तों व पंचायत के सहयोग और दान-दक्षिणा से धीरे-धीरे इस चबूतरे ने एक मंदिर का रूप ले लिया, जो पूरी तरह 1983 में एक मंदिर के रूप में स्थापित हो गया. बस, तब से यहां के स्थानीय लोगों की इस मंदिर और भगवान हनुमान पर असीम आस्था है.


Read:हनुमान जी की शादी नहीं हुई, फिर कैसे हुआ बेटा? जानिए पुराणों मे छिपी एक आलौकिक घटना


हनुमान भक्त अरुण सिंह ठाकुर ने बताया कि विभिन्न पारिवारिक आयोजन बजरंगी के आशीष के बिना अधूरे माने जाते हैं. सालों से चली आ रही ये परंपरा आज भी कायम है.

कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि जब भी यहां कोई शादी या विवाह का आयोजन होता है तो नववधू गृह – प्रवेश से पहले बजरंगी का आशीर्वाद जरूर लेती है. उनके आशीष से ही घरों में मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है. यहां लोगों की भगवान बजरंगी में इतनी आस्था है कि भक्त उनके लिए विभिन्न धार्मिक आयोजन करते हैं, विशेषकर हनुमान जयंती के अवसर पर इस मंदिर और क्षेत्र में भव्य आयोजन देखते ही बनता है.Next


Read more:

किस मन्नत के लिए यह भक्त हथेली पर दीप जलाकर कर रहा कठोर तप

इस मंदिर में देवी मां की पूजा से पहले क्यों की जाती है उनके इस भक्त की पूजा

जानें मंदिर और मस्जिद के गुंबद का क्या है रहस्य

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *