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900 साल बाद लगा दुर्लभ सूर्यग्रहण, जानिए ग्रहण के फायदे-नुकसान, क्या करें क्या न करें और ग्रहण के बारे मेें सबकुछ

Rizwan Noor Khan

21 Jun, 2020

 

 

दुनियाभर में 21 जून को साल 2020 का सबसे बड़ा सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। इस बार का यह सूर्यग्रहण वलयाकार होने की वजह से खास है। खगोलशास्त्रियों के मुताबिक यह दुर्लभ सूर्यग्रहण 900 साल बाद लग रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्यग्रहण कई फायदे और नुकसान भी होते हैं। इस दौरान खास तरह के काम नहीं करने की सलाह भी दी जाती है।

 

 

 

 

 

क्यों हो रहा सूर्य ग्रहण
खगोलशास्त्रियों के मुताबिक पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा के आ जाने से यह दुर्लभ सूर्यग्रहण घटने वाला है। इस दौरान चंद्रमा की छाया सूर्य का 99 फीसदी हिस्सा ढंक लेगी। ग्रहण के दौरान सूर्य वलयाकार स्थिति में होगा। इस स्थिति में सूर्य पृथ्वी से एक आग की अंगूठी की शक्ल में दिखाई देगा। वलयाकार स्थिति सिर्फ 30 सेकेंड के लिए ही रहेगी। ऐसा दुर्लभ सूर्यग्रहण 900 साल पहले लगा था।

 

 

 

 

 

पहला वलयाकार सूर्यग्रहण
खगोलशास्त्रियों के अनुसार भारत में सूर्यग्रहण सुबह 9 बजे के बाद से शुरू होगा और दोपहर 3 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र में प्रारम्भ होकर आर्द्रा नक्षत्र में मोक्ष हासिल करेगा। खगोलशास्त्रियों और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वलयाकार दुर्लभ सूर्यग्रहण इससे पहले 21 अगस्त 1934 को पहली बार देखा गया था। 21 जून के बाद अगला सूर्यग्रहण 14 साल बाद 21 मई 2034 को देखा जाएगा।

 

 

 

 

 

इसलिए खास है यह सूर्यग्रहण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सूर्यग्रहण विशेष नक्षत्रों में घट रहा है। इसलिए यह अतिदुर्लभ सूर्यग्रहण कहा जा रहा है। यह सूर्यग्रहण न तो आंशिक है और न ही पूर्ण। इसके लिए साल के सबसे बड़े दिन यह सूर्यग्रहण घटने के कारण भी इसे विशेष संयोग माना जा रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

सूर्यग्रहण के नुकसान और फायदे
वलयाकार सूर्यग्रहण को लेकर ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि इसकी वजह से प्रकृति अपने स्वरूप को बदल सकती है। यानी मौसम में परिवर्तन के साथ भारी बारिश की आशंका बनती है। इसके अलावा आपदा, रोग, प्रलयकारी दुर्घटनाएं होने का अनुमान लगाया जाता है। ज्योतिष के अनुसार सूर्यग्रहण के दौरान हवन, पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।

 

 

 

 

क्या करें और क्या न करें
ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहण के दौरान शुद्ध जल से स्नान के बाद पूजा—पाठ, दान, मंत्र सिद्घि, हवन—यज्ञ समेत शुभकार्यों करने चाहिए। इस दौरान विवाद, षड़यंत्र, झूठ बोलने और नाखून नहीं काटने चाहिए। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को बिना पेट ढंके बाहर निकलने की मनाही होगी। सूर्यग्रहण को नंगी आंखों से देखने की मनाही होती है।…Next

 

 

 

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