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अटल बिहारी वाजपेयी- हिंदी जीवनी एवं रोचक तथ्य

Hindi Blog हिंदी ब्लॉग - Ravi Prakash Sharma हिंदी ब्लॉगर

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अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन रोचकताओं से भरपूर है। एक पत्रकार, मंझा हुआ कवि, ज्ञानी वक्ता, ओजस्वी भाषण दाता और महान राजनीतिज्ञ। एक साधारण व्यक्ति में इतने सारे गुणों का होना यह दर्शाता है कि सच में वह वो कोई विद्वात्मा है। अटल जी के जीवन से जुड़े अनेक रोचक तथ्य ऐसे हैं जो उनको मात्र राजनीतिज्ञ कहलाने की अवधारणा से ऊपर उठाते हैं। अटल जी के लाइफ फैक्ट्स पर हम चर्चा जारी रखेंगे पहले जान लेते हैं उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े चंद रोचक तथ्यों को।

अटल बिहारी के राजनीतिक जीवन का रोचक तथ्य

  • – 1957 से वर्ष 2003 करीब 50 साल तक राजनीति में सक्रिय रहे।
  • – इन्होंने 3 बार प्रधानमंत्री पद का भार संभाला।
  • – गाँधी जी के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और 23 दिन के लिए जेल गए।
  • – 1957 में मात्र 32 वर्ष की आयु में यूपी के बलरामपुर से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
  • – 1980 में बीजेपी के गठन के बाद वे पहले अध्यक्ष चुने गए।
  • – ये दूसरे ऐसे राजनेता हैं जन्होंने सबसे ज्यादा लोकसभा चुनावों में विजय हासिल की।
  • – 25 दिसंबर 2014 को इन्हें भारत रत्न देने की घोषणा की गयी।
  • – इनके भाषण को सुनकर नेहरू जी ने 1957 में ही कह दिया था कि ये एक दिन देश के भावी प्रधानमंत्री बनेंगे।
  • – वर्ष 1998, पोखरण में 5 परमाणु परीक्षण करके दुनिया को भारत की ताकत दिखाई।
  • – ये पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पूरे 5 साल तक सफल सरकार चलायी।
  • – वर्ष 1999 में ‘सद्दा-ए शरहद’ नाम से दिल्ली से पाकिस्तान बस सेवा शुरू की।

भारतीय राजनीति में यूं तो साम, दाम, दंड, भेद का बोल बाला रहा है किन्तु अटल जी ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की राजनीति को दरकिनार कर अपनी एक आदर्शवादी और सैद्धांतिक राजनेता की छवि बनाई। यह बहुत कम लोग जानते हैं की अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना राजनीतिक सफर एक साम्यवादी नेता के तौर पर शुरू किया था। किन्तु साम्यवाद की आड़ में फायदे एवं लालच की हो रही राजनीति वह बर्दाश्त ना कर सके और बाद में बाबा साहेब आप्टे से प्रभावित होकर साल 1939 में आरएसएस से जुड़कर उन्होंने हमेशा के लिए साम्यवादी चोले को उतार फेंका।

अटल जी की प्रेम कहानी

प्रेम ईश्वर द्वारा दिया सबसे कीमती उपहार है जो इंसान के ह्रदय में वास करता है। वैसे तो प्रेम के कई अलग अलग रूप हैं किन्तु इसका प्रमुख रूप तभी सामने आता है जब आप अपने से विपरीत लिंग के प्रेमी बन जाते हैं। ऐसा कोई शख्स नहीं जो अपने जीवन में कभी प्रेम के पड़ाव पर ना पहुंचा हो और थोड़ा सा रूमानी ना हुआ हो।

अपने राजनीतिक जीवन से परे अटल जी का एक अन्य जीवन था जिसका नाम था ‘कवि जीवन’, ये हम जानते हैं अटल बिहारी अपनी कविताओं के लिए भी जाने जाते हैं। वीर रस, श्रृंगार रस और करुणा से भरी उनकी कविताएं उनके असल चरित्र एवं मनोभाव को दर्शाती हैं। कवि स्वाभाविक रूप से प्रेमी भी होता है; काव्य में प्रेम मिलन और वियोग का संगम तब तक संभव नहीं जब तक काव्य रचयिता स्वयं प्रेम को महसूस ना करे।

‘राजकुमारी कौल’ यही वो नाम है जिसने अटल बिहारी के दिल में प्रेम की लौ जलाई किन्तु अफ़सोस प्रेम का यह किस्सा अधूरा ही रह गया। राजकुमारी कौल और अटल बिहारी वाजपेयी का प्रेम प्रसंग राजनीतिक गलियारों में भी खूब गूंजा किन्तु किसी ने सार्वजानिक रूप से इस पर कोई टिपण्णी नहीं की। शायद अटल जी का राजनीतिक कद उनके प्रेम की चर्चा का बाधक था। राजकुमारी कौल और अटल जी की मुलाक़ात 1940 के दौर में हुई थी, दोनों ग्वालियर के एक ही कॉलेज (पूर्व में विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज)) में साथ पढ़ते थे। उस दौर में भारतीय समाज में जवान लड़के एवं लड़कियों की दोस्ती को अच्छा नहीं माना जाता था जिसके चलते उस ज़माने के प्रेमी युगल एक दूसरे से कम संपर्क किया करते थे।

13 सितंबर सन 1925 को उज्जैन, मध्य प्रदेश में जन्मी राजकुमारी कौल उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध राजवंशपरिवार से ताल्लुक रखती थीं। कॉलेज के दिनों में एक बार युवा अटल बिहारी ने लाइब्रेरी की एक किताब में उनके लिए एक पत्र रख दिया, कहा जाता है वह पत्र राजकुमारी ने पढ़ा और अपना जवाब भी उसी किताब में लिखकर दबा दिया किन्तु दुर्भाग्यवश वह पत्र कभी अटल बिहारी को नहीं मिल पाया।

आगे चलकर लाख विरोध के बाद भी राजकुमारी कौल के पिता गोविंद नारायण हक्सर ने उनकी शादी कॉलेज शिक्षक ‘बृज नारयण कौल’ से करवा दी और इस प्रकार राजनीतिक गलियारे की सबसे बड़ी एवं मधुर प्रेम कहानी का अंत हो गया। अटल बिहारी आजीवन अविवाहित रहे किन्तु उनकी कविताएं उनके ह्रदय में बसी हुई प्रेम कहानी को बयां करती हैं। कुछ प्रेम कहानियां अधूरी रह जाती हैं… शायद उनकी खूबसूरती भी उनके अधूरे रह जाने में ही है।

अटल जी का आरम्भिक जीवन

  • – इनका जन्म 24 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में हुआ।
  • – इनका पैतृक निवास उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में था।
  • – पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी था और वे ग्वालियर में अध्यापन का कार्य करते थे।
  • – माता का नाम कृष्णा वाजपेयी था।

ऊपर दिए गए तथ्यों को पढ़कर आप समझ सकते हैं की अटल बिहारी किसी धनि परिवार में नहीं जन्में थे। हमारी तरह एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में जन्मा व्यक्ति कभी धन का लोभी नहीं बना। पिता हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि माने जाते थे जिसका कुछ असर अटल जी पर भी पड़ा जिसके चलते काव्य के गुण इनमें वंशानुगत रहे। बीए, एमए की डिग्री हासिल करने के बाद एल॰एल॰बी॰ की पढ़ाई भी प्रारम्भ की किन्तु उसे विराम देकर पूरे मन से ये राजनीति में प्रवेश कर गए।

प्रधानमंत्री के रूप में किये गए कार्य

  1. – भारत को परमाणु संपन्न राष्ट्र बनाना।
  2. – भारत पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने की पहल।
  3. – कारगिल युद्ध का होना और विजय प्राप्त करना।
  4. – स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रमार्ग परियोजना की शुरुआत।
  5. – सौ वर्षों से लंबित कावेरी जल विवाद को सुलझाया।
  6. – देश में टेलीकॉम स्पेक्ट्रम, रेलवे, सड़क एवं हवाई अड्डों जैसे बुनियादी ढांचें का निर्माण।

देश में सरकारी खर्चे पर रोजा इफ़्तार की शुरुआत भी अटल जी ने ही आरंभ की। राष्ट्रहित के लिए अनेकों कार्य अटल जी ने किये जिनकी पूर्ण चर्चा यहाँ संभव नहीं। अटल की सादगी एवं विचार से प्रभावित विपक्षी दल के नेता यह कहते थे की आप आदमी अच्छे हैं किन्तु गलत पार्टी में हैं, इसपर अटल जी ने एक मजेदार जवाब दिया की यदि मैं आदमी अच्छा हूँ तो फिर गलत पार्टी में कैसे हो सकता हूँ। अपनी इसी हाज़िर जवाबी के लिए अटल न सिर्फ अपने भारत देश अपितु पूरे विश्व के प्रसिद्द नेता कहलाये।

अटल जी का कवि जीवन

कवि जीवन पर आने से पहले मैं बता दूँ की कानपूर विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए उत्तीर्ण करने के बाद अटल जी ने पत्रकारिता में भी हाथ आजमाया और राष्ट्र धर्म, पांचजन्य एवं वीर अर्जुन जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया।

जहाँ तक कवि कहलाने का प्रश्न है तो मैंने ऊपर लिखा ही है की अटल जी को काव्य रचना का ज्ञान वंशानुगत ही मिला। पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी हिंदी व ब्रजभाषा के बड़े कवि थे अतः उनका गुण भी अटल जी में प्रवेश कर गया और आगे चलकर अटल जी ने अनेकों हिंदी कवितायें लिखीं जिन्हें आज भी पढ़कर मन भावनाओं से भर जाता है।

काव्य संग्रह –

– न दैन्यं न पलायनम् नामक यह काव्य पुस्तक वर्ष 2006 में किताब घर द्वारा प्रकाशित हुई। कविताओं से भरी इस पुष्तक में कुल 103 पृष्ठ थे, जिसे पाठकों द्वारा काफी सराहा गया।

– 168 पृष्ठों की मेरी इक्यावन कविताएँ नामक काव्य पुस्तक भी वर्ष 2006 में किताब घर द्वारा प्रकाशित हुई, जिसे सराहना मिली।

इन 2 प्रसिद्ध काव्य पुस्तकों के अतिरिक्त अटल बिहारी जी ने 20 से भी ज्यादा प्रतिनिधि रचनाएँ की। एक राजनेता के पद पर रहते हुए, तमाम राजनीतिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए इतने बड़े स्तर पर काव्य की रचना करना उनकी काव्य कुशलता व लेखन प्रेम को दर्शाता है। राजनेता तो इस देश में कई आये गए और कई आयेंगे मगर अटल बिहारी वाजपेयी जैसा कोई भी नहीं होगा।

अंत में,

किसी के जीवन को एक लेख में समेट देना शायद उसके जीवन के प्रति अन्याय ही कहलायेगा इसलिए मैं ये नहीं कह सकता की मैंने अटल जी के जीवन से जुड़े हर पहलु को बयां कर दिया है। इंसान जितना बाहर से दिखता है उससे कहीं ज्यादा वह अंदर से गहरा होता है।

अटल जी एक कवि थे राजनेता बाद में अतः उनके अंतर्मन की गहराई को कोई आज तक मांप नहीं पाया। आखिर क्यों उन्होंने विवाह नहीं किया ? क्यों उन्होंने छल कपट की राजनीति नहीं की ? यह सब कुछ एक अबूझ पहेली है। इससे भी बड़ी बात ये है की देश का 3 बार प्रधानमंत्री रहने एवं प्रसिद्ध नेता रहने के बावजूद भी उनके पास ‘धन’ की सदैव कमी रही।

भगवान ने ईमानदारी व सत्यनिष्ठा की राह पर चलने वाले युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी को जरूर अपने ह्रदय में स्थान दिया होगा।

लेखक:
रवि प्रकाश शर्मा

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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