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कोरोना और राजनैतिक पैंतरेबाजी

apnisoch

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आज जब पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण से जूझ रही है, भारत के राजनीतिज्ञ इस महामारी का मिलजुलकर सामना करने के स्थान पर अपनी अपनी राजनैतिक पैंतरेबाजी में व्यस्त हैं। अपने देश मे स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है इस बात का अंदाज सिर्फ दिन प्रतिदिन कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या की बृद्धि से लगाया जा सकता है। स्थिति की भयावहता को इस बात से समझ सकते हैं कि महाराष्ट्र जैसे राज्य और देश की औद्योगिक राजधानी मुम्बई के हालात इतने खराब हैं कि वहाँ की राज्य सरकार को कर्फ्यू लगाना पड़ा है।

आज इस विषम स्थिति का जिम्मेदार कौन है ? केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार , पक्ष हो या विपक्ष सभी एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने मे अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं। इस बात की चिंता बहुत काम राजनेताओं को है कि देश की इतनी बड़ी आबादी को इस विकराल रूप धारण करते संकट से कैसे बचाया जाय।

यह ठीक है कि चुनावी जीत हासिल करना भी जरूरी है, क्योंकि यह चुनाव ही है जो इन राजनैतिक दलों और राजनेताओं को संजीवनी प्रदान करता है। परंतु आखिर क्या चुनाव जीतना इतना आवश्यक है कि सामान्य मानव के जीवन का भी इसके सम्मुख कोई महत्व नहीं ? चाहे कुछ भी हो सभी राजनेताओं और उनके दलों को यह बात ध्यान मे रखनी होगी कि चुनाव जीतना महत्व पूर्ण है परंतु जन सधारण के स्वास्थ्य और उनके जीवन की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं । और यह भी इन चतुर राजनीतिज्ञों को समझना होगा कि वे चाहे कितने भी चालाक क्यों न हों जनता उनके राजनीतिक पैंतरेबाजी की बात को भली भांति समझती है और समय पड़ने पर उन्ही की तर्ज पर अपना जबाव भी देती है। हम कई सारे चुनाव एवं उपचुनाव मे इस बात की बानगी पूर्व मे भी देख चुके हैं और आने वाले चुनाओं और उपचुनाओं के नतीजों में भी इसे देखेंगे ।

आज जरूरत इस बात की है कि सभी राजनीतिज्ञ अपनी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनसमुदाय और उनकी जरूरतों और उनकी भलाई के विषय में सोचे और इस बात पर अपना ध्यान केंद्रित करें कि दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही कोरोना की समस्या का निवारण कैसे हो ?यह कोई स्थानीय, प्रांतीय,क्षेत्रीय समस्या नहीं अपितु एक वैश्विक समस्या है, जिसे उसी रूप में और उसी संदर्भ मे देखना और समझना होगा । यदि हम सक्षम हो तो यह हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम विश्व के उन देशों का भी ध्यान रखें जो छोटे हैं, गरीब हैं ,अविकसित हैं और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। यह तो हमारे लिए फख्र की बात है कि विश्व के बहुत सारे देश हमारी ओर आशाभरी दृष्टि से देख रहे हैं और हमने बहुत सारे देशों की अपने स्तर से मदद भी की है।

बस हमें इसी बात का ध्यान रखना है कि दूसरे देशों की मदद करने के प्रयास में कहीं हमारे देश के लोगों को जरूरी संसाधन की कमी न झेलनी पड़े। यदि हमारे पास अपनी जरूरतें पूरी करने के बाद संसाधन बचते हैं तो हमें इन देशों की मदद अवश्य करनी चाहिए। यह एक राजनैतिक बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन केंद्र सरकार और उच्च प्रशासन लगातार इस बात का आश्वासन देते रहे हैं कि देश में वैक्सीन या जरूरी संशाधनों की कोई कमी नहीं है और देश की जनता को लगने वाली वैक्सीन की कमी नहीं होगी , क्योंकि वैक्सीन का देश में पर्याप्त मात्रा मे उत्पादन लगातार हो रहा है । यह बात भी हमें ध्यान मे रखनी होगी कि हमारे देश मे हर समस्या का समाधान निकलता अवश्य है, परंतु समस्या का राजनीतिकरण होने के बाद ।

बहुत सारे राज्यों ने पुनः केंद्र से लाक डाउन लगाने की मांग की है और केंद्र ने राज्यों की मांग को देखते हुए सभी राज्यों को उनके स्तर पर इसकी इजाजत दे दी है की वे अपने स्तर पर लॉक डाउन लगा सकते हैं और कुछ राज्यों ने अपने –अपने राज्य मे लॉक डाउन लगाने या उसी तर्ज पर कर्फ्यू लगाने प्रारंभ भी कर दिया है । बस इस बार एक ही बात को ध्यान रखना है कि एक बार फिर मजदूर पलायन की समस्या का सामना देश को न करना पड़े, क्योंकि इस बार किसी ऐसी परेशनी को पुनः देश झेल नहीं पाएगा और संक्रमण की गति इस बार इतनी तीव्र है कि स्थिति संभाले नहीं सम्हलेगी।

ऐसी स्थिति में क्या राजनतिक जुमलेबाजी और आरोप प्रत्यारोप द्वारा इसे काबू करना क्या संभव होगा। कितने आश्चर्य की बात है कि किसी राजनेता ने अपने चुनाव प्रचार में इस बात का जिक्र तक नहीं किया कि दो गज की दूरी , मास्क का उपयोग और अन्य सावधानियाँ बरतना कितना जरूरी है।यहाँ हमारे राजनेताओं का यह परम कर्तव्य है कि वे इस कोरोना काल मे आम जनमानस को जागरूक करते और उन्हें पूरी सावधानी रखने की शिक्षा देते। परंतु इन राजनेताओं का ध्यान अपने–अपने चुनाव प्रचार में हजारों और लाखों की भीड़ जुटाने मे ही लगा रहा। इनमे से किसी राजनेता ने यह क्यों नहीं सोचा कि अगर इस लाखों और हजारों की भीड़ मे 100-200 भी कोरोंना संक्रमित लोग आ गए तो फिर उस क्षेत्र के लोगों की क्या स्थिति होगी ? संयोग से इन चुनावी राज्यों में इस तरह का कोई संक्रमण या लक्षण अभी तक दिखाई नहीं दिया है , लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि ऐसा संयोग कहीं दुर्योग मे ना बदल जाए इस बात का एहतियात इन राजनेताओं को रखना ही होगा।

आज जरुरत इस बात की है कि चाहे केंद्र सरकार हो या कोई भी राज्य सरकार या कोई भी शीर्ष राजनीतिज्ञ , सभी को जनता को साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है । इस महामारी को नियंत्रित करने का यही तरीका है कि समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर इसके समाधान का उपाय खोजना होगा। यह समय इस मुद्दे का राजनीति करने का विलकुल भी नहीं है। हमारी जनता का भी यह कर्तव्य हा कि वह स्थिति को इतना हल्के में न् लें ,अपितु जो भी सावधानियाँ वरतने की सलाह हमारे डाक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही है उसका पालन अवश्य करें,इसी में उनका और देश का भला होगा । कोई कारण नहीं कि अगर सभी देशवासी एक साथ इस कोरोना के खिलाफ संघर्ष में एकजुट होकर आगे बढ़ेगे तो इस पर एक सीमा तक नियंत्रण पाने मे सफल होंगे, इस बात की परवाह न् करते हुए की राजनैतिक पैंतरेबाजी करने वालों पर चाहे वे किसी भी पार्टी के हों ,समय आने पर उनके द्वारा किये गए दुषप्रचार एवं भ्रम का वातावरण उत्पन्न करने का उचित सवाल जबाव किया जाएगा ।

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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