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सरकार बनाम घोटाला

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संसद में जब सांसदों को एक दूसरे पर दोषारोपण करते हुए देखती हूँ तो विस्मित हो जाती हूँ. क्या ये सब बुद्धिजीवी हैं ? जनता इन्हें चुन कर इन पर भरोसा कर इन्हें संसद भवन तक पहुँचाया है.
जब सांसदों को एक दूसरे पर आरोप मढ़ते देखती हूँ तो बाल्यावस्था की एक सुनी सुनाई घटना स्मरण हो आता है . बड़ी माँ कहा करती थी सीवान में पांच भाई रहते थे. वे रोज़ आपस में लड़ते थे. गाली गलौज करते थे. लेकिन जब कोई तीसरा बचाने जाता था तो सभी भाई मिलकर बचाने वालो को ही मारने दौड़ते थे, उन्हें गाली देने लगते थे. यही बात हमारे देश के राजनीतिज्ञों में भी देखने को मिलती है.
आपस में अंदरुनी झगड़ा कितना भी क्यों न हो लेकिन जब विपक्ष का कोई मुद्दा हो तो आपसी वैर भूलकर सभी विपक्ष पर टूट पड़ते हैं. भले ही किसी किसी को (जो प्रभावित न हो रहें हों उन्हें) विपक्ष की बात सही लग भी रहा हो तो भी वे अपनी पार्टी के सदस्यों का ही समर्थन करते दीखते हैं. सत्य का पक्ष और असत्य का विरोध पार्टीगत हो रहा है. फख्र होना चाहिए इस देश के जनताओं को अपने नेताओं पर !
एक पक्ष आरोप लगाकर अपना पक्ष रखना चाहता है , जिसपर आरोप लगाया जाता है उसके असंख्य अवगुण गिनाया जाता है , हो हल्ला होता है और समय व्यतीत हो जाता है. पक्ष -विपक्ष एक दूसरे के साथ गलबहियां डालकर बाहर निकलते हैं. देश की सबसे सस्ती कैंटीन में चाय पीते हैं और पुनः कल की तयारी में लग जाते हैं.

देश हित महत्वपूर्ण नहीं है, अपनी पार्टी के सदस्यों ने गलत भी किया है तो हमें उनका बचाव करना है, यह पाठ सभी याद रखते हैं. इतना ही नहीं वे तो स्मरण रखने में माहिर है. पूर्व सत्ताधारी ने ऐसा किया हमने तो कुछ भी नहीं किया ! का राग भी अलापते रहते हैं. आज के सत्ताधारी कहेंगे जब वे सत्ता में थे तो उन्होंने इतना घोटाला किया इतने अपराध किये, उन्होंने ये किया , वो किया फिर जब वे विपक्ष में हैं तो -हमसे कोई प्रश्न नहीं कर सकते, भलेही हम कुछ भी करें. कल तक जिनके नज़र में कोई क्रियाकलाप अपराध होता था वही क्रियाकलाप सत्ता में आने के बाद अपराध नहीं रहा ! विस्मित तो केवल जनता को होना है. जनता दर्शक होता है और विस्मित रहना या होना उनका फ़र्ज़ है !

जब तक चुनाव का समय रहता है तब तक ही जनता का मह्त्व है, सरकार के गठन के बाद जनता को केवल पक्ष और विपक्ष की कहा-सुनी, संसद में उठा-पटक तथा इन दृश्यों के अंश दूरदर्शन पर देख कर लुत्फ़ उठाना है. बाँकि फिर अगले पांचवी साल की प्रतीक्षा करना है.और पुनः इतिहास दोहराता रहेगा.

मजे की बात तो यह है जब कोई एक-दूसरे को कहता है-अपना सड़ा हुआ अंग काट कर फेंको तो जवाब मिलता है तेरे सड़े हुए थे , तूने नहीं काटे . मैं क्यों काटूं? सड़ांध में तो जनता को ही जीना पड़ता है. तुमने काटी, मैं भी काटता हूँ , तूने तो सालों साल काटे मुझे तो अभी अवसर मिला है, ये कहते नहीं छुपा हुआ सन्देश होता है.
हल्ला गुल्ला करना ही पड़ेगा . जब तुमने हल्ला किया तो हम भी तो सहते थे,चुप रहते थे. आज हम हल्ला कर रहे हैं तुम भी सहो. तेरे और मेरे दोनों के नेता तो मौन व्रती हैं ही न ! अगर हल्ला गुल्ला बंद हो जायेगा तो जनता समझेगी नहीं क्या ! तुम्हें भी पहचान लेगी और हमें भी पहचान लेगी.

हम तो सरकार का मतलब घोटाला समझते है भईया . क्योंकि जब से होश संभाली अधिकांश गुंडों को राजनीतिज्ञ बनते देखा, डॉन लोगों को विधायक,सांसद बनते देखा (कुछ को छोड़ कर). अपराधी लोग विधेयक बनाते रहे हैं. सरकार किसी भी पार्टी की हो घोटालाविहीन हो ही नहीं सकती. ६७ वर्षों से सरकार और घोटालों का अन्योन्याश्रय सम्बन्ध रहा है. भैया हम जनताओं केलिए सरकार का अर्थ तो घोटाला होता है. लेकिन यह कह नहीं सकते क्योंकि सरकार से तो सभी को डरना होता है.
१९४७ में आई इन ये ट्रेझर चेस्ट का गायव होने वाला घोटाला
१९४८ में जीप स्कैंडल केस
१९५१ में मुंध्रा स्कैंडल और साइकल इम्पोर्ट घोटाला
१९५६ में बी एच यु फण्ड में घोटाला
१९६० में तेजा लोन घोटाला
१९६४ में प्रताप सिंह कैरों घोटाला
१९६५ में कलिंगा टियूब घोटाला
१९७१ में नागरवाला घोटाला
१९७४ में मारुती घोटाला और तेल घोटाला
१९८१ में सीमेंट घोटाला (अंतुले वाला)
१९८७ में बोफोर्स घोटाला
१९८९ में सेंट किट्स घोटाला
१९९० में एयर बस घोटाला
१९९२ में हर्षद मेहता सेक्युरिटी स्कैम, पामोलिन आयल स्कैम, इंडियन बैंक स्कैम
१९९४ में चीनी(शुगर) इम्पोर्ट स्कैम
१९९५ में मेघालय फारेस्ट स्कैम, प्रीफरेंशियल अलॉटमेंट स्कैम,युोगोस्लाव दिनार स्कैम,और पुरलिा आर्म्स ड्राप
१९९६ में सुखराम टेलीफोन स्कैम, सी आर भंसाली स्कैम और फ़र्टिलाइज़र इम्पोर्ट स्कैम
१९९७ में जलगांव हाऊसिंग स्कैम,कॉब्लर स्कैम,सेरेगर स्कैम और केरल आइस क्रीम वाला कांड
२००१ में बी जे पी के बंगारू लक्ष्मण वाला आपरेसन वेस्ट इंड, यु टी आई एवं केतन पारीख सिक्योरिटी स्कैम और कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज स्कैम
२००२ में तेलगी वाला स्टाम्प पेपर स्कैम, और पी ऍफ़ स्कैम
२००३ में हुडको स्कैम
२००४ में बिहार फ्लड रिलीफ स्कैम, आई पी ओ स्कैम, आयल फॉर फ़ूड स्कैम,और ताज को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग स्कैम
२००६ में पंजाब सिटी सेंटर प्रोजेक्ट स्कैम,पेन्नी स्टॉक स्कैम और उत्तरप्रदेश आयुर्वेदा स्कैम
२००८ में कॅश एट जजस डोर स्कैम , पाजी फोरेक्स स्कैम,आर्मी रासन पिल्फरेज स्कैम , स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र स्कैम , और हसन अली ब्लैक मनी स्कैम
२००९ में गोवा सेज़ स्कैम,राईस एक्सपोर्ट स्कैम,उड़ीसा पैडी स्कैम,सुखना लैंड स्कैम,वसुंधरा राजे दीनदयाल उपाध्याय लैंड स्कैम,ऑस्ट्रल कोक स्कैम और गुजरात शुगरकेन स्कैम
२०१० में इसरो का एस बैंड स्कैम, आंध्र प्रदेश एम्मार स्कैम,कर्नाटक लैंड स्कैम,उत्तराखंड लैंड स्कैम,कर्नाटक हाऊसिंग बोर्ड स्कैम , चंडीगढ़ बूथ स्कैम,और ओडिशा इलीगल माइनिंग स्कैम
२०११ में बेल्लारी माइनिंग स्कैम,बेलेकेरी पोर्ट स्कैम,टाट्रा स्कैम,एल आई सी हाउसिंग लोन स्कैम,इन टी आर ओ स्कैम,गोवा माइनिंग स्कैम,ब्रुहत बेंगलुरु महानगरपालिका स्कैम,हिमाचल प्रदेश (एच आई एम यु डी ए) हाउसिंग स्कैम, पुणे हाउसिंग स्कैम, पुणे लैंड स्कैम,ओड़िसा पल्स स्कैम,केरल इन्वेस्टमेंट स्कैम
, महाराष्ट्र एजुकेशन स्कैम , महाराष्ट्र पी डी एस स्कैम ,उत्तरप्रदेश टी ई टी स्कैम,उत्तरप्रदेश मनरेगा स्कैम, उड़ीसा मनरेगा स्कैम, इंडियन एयर फ़ोर्स लैंड स्कैम,बिहार सोलर लैंप स्कैम, बी एल कश्यप ई पी ऍफ़ ओ स्कैम , असम एजुकेशन स्कैम और पुणे यु एल सी स्कैम
२०१२ में तमिलनाडु का ग्रेनाइट स्कैम,हाईवे स्कैम, काइनेटिक फाइनेंस स्कैम, अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट स्कैम,फोरेक्स स्कैम,मराष्ट्रा स्टाम्प ड्यूटी स्कैम,महारष्ट्र लैंड स्कैम,एम ई ए गिफ्ट स्कैम.हिमाचल प्रदेश पल्स स्कैम,आंध्र प्रदेश लिकर स्कैम,जे एंड के क्रिकेट असोसिएशन स्कैम, जे एंड के पी एच ई स्कैम, जे एंड के रिक्रूटमेंट स्कैम, जे एंड के डेंटल स्कैम , पंजाब पैडी स्कैम,इन एच पी सी सीमेंट स्कैम, हरयाणा फारेस्ट स्कैम, गिरीवन (पुणे) लैंड स्कैम, टॉयलेट स्कैम, उत्तरप्रदेश स्टाम्प ड्यूटी स्कैम, उत्तरप्रदेश हॉर्टिकल्चर स्कैम, उत्तरप्रदेश पाम ट्री प्लांटेशन स्कैम, उत्तरप्रदेश सीड स्कैम, उत्तरप्रदेश एलीफैंट मेमोरियल स्कैम, उत्तरप्रदेश लैकफेड स्कैम,पटिआला लैंड स्कैम , टैक्स रिफंड स्कैम , बेंगलुरु मेयरस फण्ड स्कैम , रांची रियल एस्टेट स्कैम , दिल्ली सर्जिकल ग्लव्स प्रोक्योरमेंट स्कैम , आधार स्कैम, BEML हाउसिंग सोसाइटी स्कैम , MSTC गोल्ड एक्सपोर्ट स्कैम , TIN स्कैम ,हरयाणा फारेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन कॅश स्कॅम , और नयागाओं (पंजाब ) लैंड स्कैम ,
२०१३ में वीरभद्र सिंह ब्राइबरी , मध्य प्रदेश प्री मेडिकल टेस्ट स्कैम , मध्य प्रदेश व्हीट प्रोक्योरमेंट स्कैम , गुडगाँव टोल प्लाजा स्कैम, EPFO(एम्प्लोयी प्रोविडेंट फण्ड )स्कैम , हरयाणा सीड स्कैम, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन -DGCA ‘फ्री टिकट ‘ स्कैम , LTC(लीव ट्रेवल कन्सेशन ) स्कॅम , NSEL स्कॅम ,रेलवे आयरन ऑर फ्रेट स्कैम, उत्तर प्रदेश इलीगल सैंड माइनिंग स्कैम, वोडाफोन टैक्स स्कैंडल,रेलवे प्रमोशन स्कैम, केरला सोलर पैनल स्कैम , ओडिशा लैंड एलॉटमेंट स्कॅम , इंडियन हेलीकाप्टर ब्राइबरी स्कैंडल और मध्य प्रदेश स्कालरशिप स्कॅम
२०१४ में मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट Ltd (MIAL) स्कैम , आविन स्कैम , स्मार्ट सिटी कोच्ची स्कैम , कॅश फॉर MLC सीट स्कैम, हरयाणा एंड राजस्थान इलीगल माइनिंग इन अरवल्ली रेंज माउंटेन्स , सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी डेवलपमेंट अथॉरिटी और SJDA स्कैम , वेस्ट बंगाल, रिलायंस जिओ स्पेक्ट्रम ऑक्शन रिगिंग स्कैम, ओडिशा इंडस्ट्रियल लैंड मॉर्गेज स्कैम, द नेशनल हेराल्ड ( इंडिया ) लैंड स्कॅम , व्यापम स्कॅम, हरयाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HUDA)डिस्क्रेशनरी कोटा प्लाट स्कैम ,HPCA स्कैम , इंडियन रेलवेज -रेलटेल कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया मोबाइल स्कैम , हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड एंड रोल्स -रॉयस डिफेंस स्कैम , एयर इंडिया फैमिली फेयर स्कीम स्कैम, बोकारो स्टील प्लांट रिक्रूटमेंट स्कैम , देल्ही जल बोर्ड स्कैम , इंडियन रेलवेज “इमरजेंसी कोटा ” टिकट्स स्कैम और सिद्धार्थ मेहरोत्रा (ग्रोसरी स्कॅम , गुडगाँव
अब जब १९४७ से अब तक इतने स्कैम घोटाला देखने को मिले तो जनता क्यों न सरकार का अर्थ घोटाला समझे?
कांग्रेस के सरकार में घोटाला, जनता सरकार में घोटाला, भाजपा सरकार में घोटाला, एनडीए में घोटाला,यूपीए में घोटाला, यहाँ घोटाला तब से है जबसे सरकार बनना शुरू हुआ, तब अगर हम जनता लोग ‘सरकार’ का मतलब ‘घोटाला’ समझें तो इसमें हर्ज क्या है? मुझे किसी ने सुनाया था कि राजनीतिज्ञ का कहना होता है –
“तुम भी लूटो, हम भी लूटें,
लूटने की आजादी है,
सबसे ज्यादा वही लूटेगा
जिसके बदन पे खादी है.”
अतः ‘सरकार’ का पर्यायवाची अगर ‘घोटाला’ को कहें तो शायद कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा.
डा. रजनीदुर्गेश .

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