Menu
blogid : 4642 postid : 50

शेरों का ही नहीं बकरियों का भी रखो ख्याल, सैफई और कन्नौज के पार भी देखो टीपू सुलतान

anurag

  • 70 Posts
  • 60 Comments

akhilesh-election-posterप्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति दिन-ब-दिन बिगडती जा रही है। आये दिन लूट हत्या और बलात्कार की घटनाये बढ़ रही है। प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ रहा है, बरेली में दंगे हो रहे है। प्रदेश का बड़ा हिस्सा बिजली, पानी और सड़क के लिए त्राहि-त्राहि कर रहा है। पूर्वांचल में इंसेफलाइटिस अब तक 125 बच्चों को लील चुकी है। लेकिन प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। उनको कानून व्यवस्था और बिजली व्यवस्था को मजबूत करने से ज्यादा जिलो के नाम बदलने और सैफई में लाइन सफारी बनवाने का काम ज्यादा महत्वपूर्ण लग रहा हैं। सरकार बनने के बाद से अब तक हुई कैबिनेट मीटिंगों में जो मुद्दे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहे उनमे एक था पूर्ववर्ती माया सरकार द्वारा बदले गए जिलों के नाम को फिर से बदलना और दूसरा था पिता के सपने को पूरा करने के लिए सैफई में लायन सफारी बनवाना।

सत्ता में आने के बाद से ही अखिलेश सरकार में लायन सफारी बनाने का काम जोर-शोर से शुरू हो चुका है। करोड़ों रुपए के इस प्रोजेक्ट के तहत बीहड़ों को सजाने संवारने का काम भी शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री रहते मुलायम ने चंबल के बीहड़ में लाइन सफारी बनाने का सपना देखा था। अब इस सपने को पूरा करने का बीड़ा उनके बेटे अखिलेश यादव ने उठाया है। मुलायम सिंह यादव के गृह जिले इटावा से करीब 10 किलोमीटर दूर सपनों का ये पार्क बन रहा है। करीब 150 हेक्टेयर जमीन पर फैले इस पार्क पर करोड़ों का खर्च आएगा। साल 2005 में मुलायम सिंह के सत्ता में रहते इसकी मंजूरी मिली थी। मगर 2007 में जैसे ही लखनऊ में सत्ता बदली तो डाकुओं के लिए बदनाम चंबल के इन बीहड़ों में शेरों को बसाने का काम भी ठंडे बस्ते में पड़ गया। अब अखिलेश पिता के सपनों को पूरा करने में जुट गए हैं। यहां बबूल के झाड़ों की सफाई का काम जोर शोर से चल रहा है। इसी बात को लेकर केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर अड़ंगा लगा दिया। कहा गया कि ये पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है लेकिन पिता और अपने इलाके की जनता को तोहफा देने के लिए अखिलेश हर किसी से टकराने के लिए तैयार हैं। इतने छोटे से कार्यकाल में ही आरोप लगने लगे हैं कि यूपी का ये टीपू सुल्तान सैफई और कन्नौज के पार नहीं देख पा रहा है। लैपटॉप और बेरोजगारी भत्ते वाला ये सीएम यूपी को क्या दिशा देना चाहता है ये समझ से परे है। यूपी में किन चीजों की दरकार है ये बताने की जरूरत नहीं लेकिन बतौर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सोचते हैं कि लाइन सफारी बनाकर वो लोगों का दिल जीत लेंगे।
ये सही है कि शेरो समेत तमाम विलुप्त प्राय जीव जन्तुओ का संरक्षण व तदनुरूप उनके लिए वातावरण का निर्माण करना एक सीमा तक आवश्यक है परन्तु उससे ज्यादा आवश्यक है उत्तर प्रदेश की उस तमाम आबादी का सरक्षण व संवर्धन जो आज भी जीव जन्तुओ से भी बदतर जीवन यापन को अभिशप्त है। एक अनुमान के अनुसार अकेले लखनऊ में ही रेलवे लाइन व गंदो नालो के किनारे लाखो लोग जन सविधाओ से रहित झोपड़ पट्टी में सुविधविहीन मोहल्लो का निर्माण कर नारकीय जीवन जी रहे है।  काश युवा मुख्यमंत्री अखिलेश उनके लिए कोई सफारी जोन तैयार करने की योजना तैयार कर पाते।
विडम्बना ये है कि जीव जन्तुओ के प्रति द्रवित ह्रदय रखने वाले लोग भी इन नारकीय जीवन जी रहे लोगो के प्रति उनके भाग्य में ऐसा ही है मानकर अपनी आँखे मूंद लेते है, और सबको कुछ जानते,  देखते हुए भी कुछ नहीं देख पाते।  और इसीलिए उनके लिए न तो तथाकथित दलितों की सरकार ने कुछ किया और न ही समाजवादी सरकार कुछ करते दिख रही है।

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *