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सूखती संवेदनाओं की वजहें

chalti zindgi
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सूखती संवेदनाओं की वजहें
कहां है महिलाओं की सुरक्षा सम्मान के लिए जुलूस निकालने वाले लोग मोमबत्तियां हाथ में ले सड़कों पर प्रदर्शन करने वाले लोग? कहीं मारकर उनके सम्मान को तार तार किया जाता है तो कहीं सरे आम सबके सामने ऐसा होता है। बावजूद इसके रोजाना इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं।
हमीरपुर के एक गांव में महिला की सार्वजनिक नीलामी होना कितना शर्मनाक है इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है। घटना यह साबित करती है महिला को एक व्यापार की वस्तु मान लिया गया। जिसे कोई भी बोली लगाकर खरीद सकता था। क्या हमारा समाज फिर आदिम युग में जा रहा है?
देश के कई हिस्सों में माता पिता गरीबी के कारण विवाह योग्य लडकियों को शादी करने के बजाय सौदा कर बेंच देते हैं। सवाल यह उठता है उन राज्यों की सरकारें ,पुलिस क्या कर रहीं हैं किस बात का शासन चला रही हैं? इन मामलोें में चूंकि महिला द्वारा भी कोई कड़ा प्रतिरोध नहीं किया जाता अतः ऐसा करने वालों के हौंसले बुलंद रहते हैं। केंद्र व राज्य सरकारों की जबाबदेही इस मामले में तय होनी ही चाहिए। लड़कियोें के लिए चलाई जा रही तमाम योजनाओं का पैसा आखिर जा कहां रहा है। आखिर क्यों लोग अपने जिगर के टुकडे़ का सौदा करने पर मजबूर हो रहे हैं?
इस मामले का अफसोस जनक पहलू यह है कि अब प्रशासन अपनी लापरवाही ढकने के लिए खरीद फरोख्त व नीलामी की इस घटना को शादी का रंग चढ़ाने में लगा हुआ है। इस तरह की घटना को न रोक पाना कानून व्यवस्था की बड़ी नाकामी है। सामाजिक व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए जरूरी है कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगे।

वेद प्रकाश पाठक
-स्वतंत्र पत्रकार

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