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न भूलें समाज के एहसान को

chalti zindgi
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न भूलें समाज के एहसान को
जीवन गतिशील होता है या यूं कह सकते हैं गतिशीलता ही जिंदगी की पहचान है। गति में सक्रियता का आभास होता है। जीवन के अनेक रंग हमारी आंखो के सामने से गुजरते हैं। हम देखते रह जाते हैं कि यही है जिंदगी। कई बार ऐसी घटनाएं भी हम देखते हैं कि सिहर जाते हैं। ऐसा भी कर सकता है इंसान! कुछ घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं हमारे होने का मतलब क्या है? जानते हैं हम। समय तेजी से बीतता है कल के नन्हें पौधे समय पाकर बड़े वृक्ष बन जाते हैं पर हमें क्या उनसे कुछ मिल पाता है? छाया,फल, लकड़ी या वे सिर्फ दिखते भर बड़े हैं।
सिटी बस में जल्दी चढ़ने को भीड़ दौड़ती है। जल्दी उपर चढ़ने की कशमकश में धक्का मुक्की मच जाती है। एक महिला की आंख में इसी वक्त किसी की उंगली लग जाती है, उसे तेज पीड़ा होने लगती है। भीड़ बस उसे देखती रहती है। लगता है किसी का कोई सरोकार नहीं। कोई मदद को आगे आ सकता है क्या? तभी बस में बैठी एक महिला नीचे उतरती है औार उस महिला को संभालती है। आंखो पर गर्म हवा का फुहारा करती है।
एक पल को लगा कि मानवता नहीं जागेगी क्योंकि वो सो चुकी है। लोगों ने उसे मृत समझ लिया है। लेकिन ऐसा नहीं होता।ं मानवता आ ही जाती है।
जिंदगी को जीने की कला कम ही लोगों के पास होती है। कुछ लोग इसे भोगते हैं तो कुछ लोग इसे ढोते हैं। हमारे इरादों की नफासत कहां गई? हम किसी भी तरह अपना काम बना लेना चाहते हैं। मगर भूल जाते हैं कि अपने काम को पूरा करने के लिए हमें समाज के बहुत से लोगों की मदद लेनी होती है। बिना मदद लिए हमारा काम नहीं चलता। हमारा काम पूरा नहीं हो सकता। हम समाज से अपने लिए मदद तो चाहते हैं लेकिन बदले में देना कुछ नहीं चाहते। ढेला भर नहीं। चालाकी हमेशा नहीं चलती। एक दिन आप भी भिखारी होते हैं।

चलती जिंदगी पर आपका स्वागत करते हुए …………….वेद प्र्र्रकाश पाठक

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