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जाको राखे साईंया मार सके ना कोय (लघुकथा)

merikavitamerevichar

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पूजा अस्पताल से आकर रोये जा रही थी। उसकी सास बार बार पूछ रही थी क्या हुआ क्या कहा डॉक्टर ने। पूजा के पति ने सास को बताया कि पूजा का रक्तचाप काफी ज्यादा है इसलिए बच्चे का विकास अवरोध हो रहा है। अतः गर्भपात कराने की सलाह दी है। सास ने पूजा को गले लगा लिया। इससे पहले भी पूजा के दो बार गर्भपात हो चुके थे। इस बार सातवां महीना चल रहा था।

 

 

पूजा सारा दिन रोती रही। शाम को पूजा साईं मंदिर गई वहाँ उसने निर्णय लिया कि वह इस बच्चे को जन्म देगी। उसके पति ने समझाया कि अविकसित बच्चे का क्या करोगी तो पूजा बोली आज खत्म करना वैसे दो माह बाद मुझे ईस्वर पर पूरा भरोसा है।

 

 

 

दो माह बाद पूजा ने एक पुत्र को जनम दिया। फिर भी सभी का मन घबराया था कि दो वर्षों बाद पता चलेगा कि इस शिशु का दिमाग ठीक है कि नहीं। अचानक से पूजा के पति के हाथ से चम्मच छूट कर गिरी तो उसकी आवाज से बच्चा चौंक गया। पास खड़ी डॉक्टर खुश होकर बोली सब ठीक है बच्चे ने आवाज पर प्रतिक्रिया दी इसका मतलब कान दिमाग सब काम कर रहे है। सबके चेहरों पर मुश्कान फैल गई ।
पूजा की सास ने उसे गले से लगा लिया और कहा आज तेरे विश्वास की जीत हुई।

जाको राखे सांईया मार सके ना कोय

 

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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