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ईश्वर के अवतार के पीछे की सच्चाई

Digital कलम

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“तीन मुख्य देव – श्री ब्रह्मा, श्री विष्णु व श्री महादेव जिनको हम त्रिदेव के नाम से जानते हैं, इस ब्रह्माण्ड को, पृथ्वी को तथा प्रकृति को संचालित करते हैं । सूक्ष्म से लेकर विशाल और निर्जीव से लेकर जीव तक की उत्पत्ति, उनका परिचालन तथा विनाश बिना त्रिदेव के नहीं हो सकता ।

महा ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से आरम्भ हुई यह प्रथा आज तक अनवरत चलती आ रही है और इसके विनाश तक ऐसे ही चलती रहेगी । विनाश के बाद उत्पत्ति और फिर से विनाश, इस चक्र की शुरुआत कब हुई एवं अंत कब होगा, यह तो कोई नहीं जानता । धर्म की नज़र से देखें तो यह सब वास्तविक है परन्तु विज्ञान इन सबसे इत्तफाक नहीं रखता ।

ऐसा मानते हैं कि पृथ्वी तथा मानव त्रिदेव की सबसे अनमोल रचनाओं में से एक है और सबसे प्रिय भी । जब-जब पृथ्वी पर जीव असंगत व्यवहार करने लगे या त्रिदेव के बनाये नियमों के खिलाफ गए तब-तब इस प्रिय रचना के खिलाफ कार्रवाई भी होती रही है ।

पृथ्वी पर कई अवसर ऐसे भी आए जब कुछ मानवों द्वारा असत्य तथा अत्याचार को काफी बढ़ावा दिया गया जो त्रिदेव के मन को विचलित करने लगा । फलस्वरूप त्रिदेव ने पृथ्वी पर बढ़ते हुए असत्य व अत्याचार से परेशान होकर मनुष्य के जीवनयापन की परिभाषा बदलने का सोचा और तीनों देव ने विचार कर के इसकी जिम्मेदारी श्री विष्णु जी को सौंप दी ।

इस आग्रह के बाद श्री विष्णु अलग-अलग काल में अवतार लेते, असत्य व अत्याचार का अंत करते और धर्म की स्थापना करते । श्री विष्णु के विभिन्न अवतार जिसमें मुख्य थे – श्री राम, महावीर स्वामी, गौतम बुद्ध, गुरु नानक, श्री कृष्ण आदि-आदि । इनके अवतार की वजह से कुछ समय तक तो पृथ्वी पर सत्य व शांति का वजूद रहता लेकिन अंततः असत्य व अत्याचार फैलाने वाले फिर से हावी होने लगते और पृथ्वी पर सत्य कमज़ोर होने लगता ।

इतने अवतार लेने के बावजूद, असत्य व अत्याचार का बार-बार अंत करने के बावजूद, मानव जाति ने त्रिदेव का विश्वास खो दिया । त्रिदेव को मानव जाति एक असफल रचना लगने लगी । मानव जाति को और एक युग तक जीवित रखने का औचित्य ख़त्म खोने लगा । जब त्रेता युग की समाप्ति हुई और भगवान श्री कृष्ण ने पृथ्वी लोक से विदाई ली, उसके बाद त्रिदेव ने मिल कर निश्चय किया की अब इसके बाद पृथ्वी पर श्री विष्णु अवतार नहीं लेंगे । यदि कलियुग में पृथ्वी पर ज्यादा असत्य व अत्याचार बढ़ता है तो समय से पूर्व ही सम्पूर्ण मानव जाति का विनाश करके पृथ्वी पर एक नई तरह की जाति की पुनः रचना की जाएगी ।”
(A snapshot from a mysterious Novel – “Samyant Rahasya”)
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