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श्रृद्धा पर भारी रसूख

कुछ कहना है ©
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प्रभु के दरबार में न कोई ऊंच-नीच होती है और न ही कोई छोटा-बड़ा होता है। ऐसा पुराणों में लिखा है और वह सिर्फ लिखा ही रहेगा। पिछले दिनों एक सज्जन ने इस बात को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया था। उनकी बात में भी दम था और सच्चाई थी। लेकिन तब तक यह चर्चा का विषय नहीं था। लेकिन देश के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी के बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में पंहुचने के साथ इस मुद्दे ने तूल पकडऩा शुरू कर दिया।

देश-विदेश, सैकड़ो किलोमीटर से गंगा के पावन तट पर बसी पावन नगरी में भगवान काशी विश्वनाथ के दर्शन की कामना लिए चले आ रहे श्रृद्धालुओं को भगवान के दर से बिना दर्शन के ही लौटना पड़ा। 60 साल की आरती की परंपरा को एक झटके में टूट गई। जिसकी वजह बने मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी। मिसेज अंबानी का जन्म दिन मनाने बनारस पहुंचे अंबानी परिवार के लिए भगवान को बेंच दिया गया। आखिर कब तक दिखावा करने वाले वीवीआईपीओं के लिए आम जनता को ठोकरें खानी पड़ेंगी। दुनिया की सारी सुख-सुविधाओं के साथ अब धर्म भी अमीरों का हो चला है।

पत्थर की मूर्ति का सौदा करते-करते आस्था भी बिकाऊ हो गई है। आलम यह है कि आपकी जेब में जितना माल, मंदिर में आपका उतना ही भौकाल। यह नजारा आम तौर हिंदू धर्म के अधिकतर मंदिरों में देखने को मिल जाता है। भगवान के दर पर खड़ा होकर इंसान, इंसान से ही भगवान का सौदा कर रहा है। भगवान के रचे हुए इंसान का जमीर इतना गिर चुका होगा इसकी कल्पना भगवान ने इंसान को रचते वक्त भी नहीं की होगी।

जिस देश का प्रधनामंत्री खुद को चाय बेचने वाला बताता हो, उस देश में तो कम से ऐसी कल्पना नहीं की जा सकती। खास तौर पर मोदी के लोकसभा क्षेत्र में तो किसी ने ऐसी कल्पना भी नहीं की होगी। लेकिन कल्पना और हकीकत इस बार एक दूसरे के विपरीत खड़े हैं। कुछ दिनों पहले मीडिया में एक खबर चली थी कि एक युवक को पासपोर्ट ऑफिस से परेशान किए जाने पर उसने मोदी को चिट्ठी लिखी थी। मोदी ने इससे तुर्त कार्यवाई की थी, और युवक को अगले एक हफ्ते के अंदर ही पासपोर्ट जारी कर दिया गया था। तब ऐसा लगा माने अच्छे दिन सच में आ गए हैं। लेकिन अंबानी के लिए साधओं-श्रृद्धालुओं को मंदिर परिसर से भगा देना कहां से अच्छे दिनों की ओर संकेत करता है। जाहिर है कि प्रधानमंत्री मोदी तक भी यह बात पंहुंची होगी। अब देखना यह है कि मोदी क्या कार्यवाई करते हैं? या यूं ही अमीरों के हाथों सत्ता का सौदा करते रहेंगे।

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