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ऐ पाक संभल जा जरा…

कुछ कहना है ©
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दोनों मुल्को के आजाद होने के बाद आज 65 साल से चली आ रही भारत बनाम पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धा खत्म होने का नाम नही ले रही है। विभाजन के समय से लेकर सन् 1965 और 1971 का युद्ध हो या 1999 में लड़ा गया कारगिल युद्ध हो या फिर चाहे सीमा पर छुटपुट गोला बारी हो, हर बार पाकिस्तान ने अपनी ओझी मानसिकता का परिचय दिया है। लेकिन हर बार भारत ने अपना सीना चैड़ा कर के उसे मुंह तोड़ जवाब दिया है।
रणभूमि से लेकर खेल के मैदान तक हर बार इन दोनो पड़ोसी मुल्को के बीच छत्तीस का आकड़ा रहा है। लेकिन भारत ने हर बार उसे छोटा भाई मानकर समझौते पर समझौता किया मगर पाकिस्तान ने भारत को उसके दुश्मन के सिवा कुछ न समझा। भारत उसे लगातार शांति वार्ता का प्रस्ताव भेजता रहा, बदले में पाक उसे दहशतगर्द भेजता रहा। ऐसे में भारत को बार-बार उसके नापाक इरादों से दो-चार होना पड़ा, चाहे वह संसद पर हमला हो या मंुबई हमला हर बार पाकिस्तान का सुर्ख काली स्याहा से रंगा चेहरा बेनकाब होता रहा है। बार-बार दिल्ली को दहलाना, मुंबई को पिघलाना और गुलाबी नगरी जयपुर को खून के रंग से लाल कर देना पाकिस्तानियों के घिनौनेपन का पुख्ता प्रमाण है।
बहुत हुआ भाईचारा, अब वक्त आ गया है पाक से उसी की भाषा में बात करने का, यह संदेश दिया हाल ही में कानपुर में आयोजित सामूहिक राष्टगान का पाक के वल्र्ड रिकाॅर्ड को तोड़ने को उमड़ी सवा लाख की भीड़ ने। भारतीयों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह पाक को अब किसी भी क्षेत्र में बक्ख्शने के मूड़ में नहीं हैं, चाहे वह युद्ध भूमि हो या खेल का मैदान या किसी अन्य प्रकार की प्रतिस्पर्धा। अब पाक को संभल जाना चाहिए, वह इसे चाहे चेतावनी समझे या आग्रह दोनों का पालन करनें में ही उसकी भलाई है, क्योंकि अगर जरुरत पड़ी तो एक सौ चालीस करोड़ की जनता अपने वीर जवानों के साथ कन्धे से कन्धा अड़ा कर पाकिस्तान के अस्तित्व पर ही एक सवालिया निशान खड़ा कर देगी।

प्रशांत सिंह
9455879256

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