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माओवाद – आखिर किसका विरोध एंव क्यो

pragati pari

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टी.वी पर खबर चल रही थी माओवादीयो के हमले मे हमारे देश के 18 जवान शहीद हो गये यह खबर सोचने पर मजबूर कर रही थी माओवादियो के यह हमले देश मे पहली बार नही है यह तो अकसर सेना,पुलिस एंव आम जनमानस को नुकसान पहुचाने का काम करते ही रहते है । आखिर क्यो देश के ही कुछ नागरिक देश के दुशमन बन गये है क्यो यह सही गलत का फर्क भूल गये है …….
हम सभी को हमारे सिस्टम से कुछ न कुछ परेशानीया है और हो भी क्यो न सभी जानते है की सिस्टम मे कमिया तो है और कई बार यह कमिया गम्भीर समस्या का रुप ले लेती है इनका विरोध होता आया है और होना भी चाहिये पर लोकतन्त्र मे विरोध का एक सही तरीका होना आवश्यक है। हाथो मे बंदूक उठाकर लोगो की जान लेने से किसका भला हो सकता है । अपने ही देश एंव देशवासियो की जान लेकर कोई क्या पा सकता है । अगर हमारे घर मे गन्दगी है तो हम घर की सफाई करेगे और औरो को सफाई के लिये प्रेरित करेगे नाकी घरवालो की जान के दुश्मन बन जायेगे। अगर शरीर के किसी अंग मे कोई परेशानी है तो उसका उपचार किया जाता है नाकी उसे काटकर फेकेगे अगर फेकेगे तो अपने ही शरीर को नष्ट करेगे और तकलीफ भी स्वय को ही होगी।
हमारे देश के इन भ्रमित लोगो को सही समझ मिलना अतिआवश्यक है। एक आकडे के अनुसार देश मे सन 2013 मे आतंकी हमले से भी अधिक लोग माओवादी हमलो का शिकार होकर मरे।
गैरो से लडना आसान है पर अपनो से हुयी लडाई मे अकसर घर टूट जाते है। अपनो से लडकर न खुशिया हासिल होती है न ही कोई मंजील। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई ने एक बार कहा था- “लोकतन्त्र मे मतभेद होने चाहिये पर मनभेद नही”
देश की तरक्की एंव शान्ती के लिये यह अतिआवश्यक है की इन भटके हुये राहीयो को सही रास्ते पर लाया जाये

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