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बाल सखा बहुतै मिलिहैं

प्रभात

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*अशर्फी लाल मिश्र *

बाल     सखा    बहुतै    मिलिहैं,
पर चन्द  की  समता कोई नहीं।
चन्द    पृथ्वीराज का बाल सखा,
जीवन पर्यन्त  छोड़ा  साथ   नहीं।।

पृथ्वीराज  बंदी था गजनी में ,
साथ    में   चंदबरदाई   भी।
गजनी में चंद  की एक पहल ,
महाराज  हमारे  तीर कुशल।

शब्द   पर   उनका  तीर   चले ,
चाहें  सुल्तान  परीक्षा  कर लें।
पृथ्वीराज ने साधा तीर कमान ,
ऊपर से देख रहा गोरी सुल्तान।।

तभी चंद ने छंद सुनाया ,
पृथ्वीराज ने तीर चलाया।
अब  भूमि   पड़ा था गोरी,
धन्य  राज   चंद  की  जोरी।।

=*=

​डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट काम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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